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नई दिल्ली। देशभर में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पेश किया लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के भारी हंगामे के कारण इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा शुरू ही नहीं हो सकी और लगातार तीन बार सदन स्थगित होने के बाद भी स्थिति नहीं बदली इसलिए आखिरकार लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी। पेपर लीक रोकने के लिए आया नया संशोधन विधेयक सरकार का कहना है कि यह संशोधन विधेयक देश में पेपर लीक, परीक्षा में नकल और अन्य अनुचित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए लाया गया है। यह कानून करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है इसलिए इस पर व्यापक चर्चा जरूरी थी। हंगामे के कारण नहीं हो सकी बहस तीन बार कार्यवाही स्थगित होने के बाद शाम पांच बजे जब लोकसभा की बैठक दोबारा शुरू हुई तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद तख्तियां लेकर सदन के बीच पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कई बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और विधेयक पर चर्चा करने की अपील की लेकिन विपक्षी सदस्यों ने उनकी बात नहीं मानी। इसके बाद सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। किरेन रिजिजू बोले- पहले चर्चा मांगते थे, अब चर्चा नहीं होने दे रहे संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कई सांसद इस विधेयक पर चर्चा की पूरी तैयारी करके आए थे और विपक्षी सदस्यों ने भी इसमें संशोधन के प्रस्ताव दिए थे। उन्होंने कहा कि यह छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण विधेयक है लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जानबूझकर इस पर चर्चा नहीं होने दे रहे हैं। श्री रिजिजू ने कहा, "जो लोग पहले दिन पेपर लीक पर चर्चा की मांग कर रहे थे, आज वही सरकार द्वारा विधेयक लाए जाने के बाद चर्चा से बच रहे हैं। मैं कांग्रेस से आग्रह करता हूं कि वह इस महत्वपूर्ण कानून पर चर्चा में हिस्सा ले और युवाओं के हित में अपनी राय रखे।" अध्यक्ष ओम बिरला ने भी की चर्चा की अपील इससे पहले दोपहर दो बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो अध्यक्ष ओम बिरला ने भी विपक्ष से हंगामा छोड़कर चर्चा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक करोड़ों विद्यार्थियों की उम्मीदों और भविष्य से जुड़ा है तथा इसका उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली पर प्रभावी रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत विचार-विमर्श में होती है और हर सांसद को इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। छह घंटे की चर्चा तय थी, समय बढ़ाने का भी था प्रस्ताव सभाध्यक्ष श्री बिरला ने बताया कि इस विधेयक पर छह घंटे की चर्चा निर्धारित की गई थी। जरूरत पड़ने पर सभी दलों की सहमति से चर्चा का समय और बढ़ाया जा सकता था ताकि हर सदस्य अपने सुझाव दे सके। उन्होंने सभी दलों से सहमति बनाकर चर्चा शुरू करने की अपील की लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। पीठासीन अधिकारी ने जताई निराशा शाम को कार्यवाही के दौरान पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा कि यह विधेयक युवाओं के भविष्य से जुड़ा है और इसकी प्रति पहले ही सभी सांसदों को उपलब्ध करा दी गई थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष भी लंबे समय से ऐसे कानून की मांग कर रहा था लेकिन अब जब सरकार विधेयक लेकर आई है तो उस पर चर्चा नहीं हो पा रही है। लगातार अपील के बावजूद जब हंगामा नहीं रुका तो उन्होंने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।