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मुंबई। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और स्वर्ण भंडार में मजबूत बढ़ोतरी की बदौलत देश का विदेशी मुद्रा भंडार 14 अगस्त को समाप्त सप्ताह में 9.905 अरब डॉलर बढ़कर 716.907 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले 24 सप्ताह का उच्चतम स्तर है। लगातार सातवें सप्ताह बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, यह लगातार सातवां सप्ताह है, जब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन सात सप्ताहों के दौरान भंडार में कुल 49.974 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। इससे पहले 7 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भंडार 14.136 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर पर पहुंचा था। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का सबसे बड़ा योगदान आरबीआई के अनुसार, समीक्षा सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार की बढ़ोतरी में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का सबसे बड़ा योगदान रहा। यह 7.225 अरब डॉलर बढ़कर 581.851 अरब डॉलर पर पहुंच गईं, जो करीब 11 महीने का उच्चतम स्तर है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में अमेरिकी डॉलर के अलावा ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राएं भी शामिल होती हैं। इनके मूल्य में बदलाव का आकलन अमेरिकी डॉलर की तुलना में उनकी विनिमय दर के आधार पर किया जाता है। स्वर्ण भंडार में भी तेज बढ़ोतरी समीक्षा सप्ताह में देश का स्वर्ण भंडार 2.679 अरब डॉलर बढ़कर 111.417 अरब डॉलर हो गया। यह पिछले करीब ढाई महीने का उच्चतम स्तर है। सोने के मूल्य में बढ़ोतरी ने कुल विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आईएमएफ के पास आरक्षित निधि बढ़ी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत की आरक्षित निधि 50 लाख डॉलर बढ़कर 4.899 अरब डॉलर पर पहुंच गई। वहीं, विशेष आहरण अधिकार यानी एसडीआर में 50 लाख डॉलर की गिरावट आई और यह 18.74 अरब डॉलर रह गया। अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है मजबूत भंडार विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी से देश को आयात भुगतान, कच्चे तेल की खरीद और बाहरी कर्ज से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मजबूती मिलती है। बड़ा फॉरेक्स रिजर्व रुपये में तेज उतार-चढ़ाव की स्थिति में रिजर्व बैंक को बाजार में हस्तक्षेप करने की अधिक क्षमता भी देता है। रुपये और निवेशकों के भरोसे को मिल सकता है सहारा मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार को आम तौर पर देश की आर्थिक स्थिरता के संकेत के रूप में देखा जाता है। इससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है और बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने में भारत की स्थिति बेहतर हो सकती है। कुल मिलाकर, लगातार सात सप्ताह से विदेशी मुद्रा भंडार में हो रही वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है, हालांकि वैश्विक मुद्रा बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और पूंजी प्रवाह में बदलाव आगे इसकी दिशा तय करेंगे।