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पटना: बिहार की ग्राम पंचायतें अब होर्डिंग, मेला, बाजार, व्यापार और अन्य स्थानीय गतिविधियों पर तय नियमों के तहत टैक्स और शुल्क लगाकर अपनी आय बढ़ा सकेंगी, जिससे पंचायतों के आत्मनिर्भर बनने और गांवों में विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने का रास्ता खुल गया है। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) अरविंद कुमार चौधरी ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस संबंध में 'ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली, 2026' को मंजूरी दे दी है। अब पंचायतें किन चीजों पर लगा सकेंगी शुल्क नई नियमावली के तहत ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में कई तरह के स्थानीय टैक्स और शुल्क लगाने का अधिकार मिलेगा। इनमें प्रमुख रूप से— * होर्डिंग और विज्ञापन बोर्ड * मेला और बाजार * व्यापार और उद्योग * पंचायत क्षेत्र में होने वाली अन्य सेवाएं और गतिविधियां जैसे मद शामिल हैं। हालांकि टैक्स और शुल्क सरकार द्वारा तय अधिकतम सीमा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही लगाए जा सकेंगे। क्यों लानी पड़ी नई नियमावली बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 में पंचायतों को टैक्स और शुल्क लगाने का अधिकार तो पहले से दिया गया था, लेकिन अब तक इसके लिए अलग से कोई नियमावली नहीं बनी थी। इसी कारण पंचायतें इस व्यवस्था का पूरा लाभ नहीं उठा पा रही थीं। अब नई नियमावली लागू होने से यह प्रक्रिया स्पष्ट और आसान हो जाएगी। पंचायतों को क्या होगा फायदा सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से ग्राम पंचायतों की अपनी आय (ओएसआर) में अच्छी बढ़ोतरी होगी। इससे पंचायतें छोटे-छोटे विकास कार्यों और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहेंगी, बल्कि अपने संसाधनों से भी विकास कार्य करा सकेंगी। गांवों के विकास को मिलेगी रफ्तार नई नियमावली लागू होने के बाद पंचायतों के पास अतिरिक्त आय का स्रोत होगा। इससे सड़क, नाली, सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य स्थानीय सुविधाओं पर तेजी से काम कराने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर गांवों के विकास को और गति देना है।