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पटना: बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने कथित 'रिशु श्री महाघोटाले' को लेकर प्रदेश की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर 20 सवाल पूछकर हमला बोला और आरोप लगाते हुए कहा कि हजारों करोड़ रुपये के इस टेंडर घोटाले में प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने के साथ ही दोषियों पर कार्रवाई की जाए। 'टेंडर माफिया को किसकी शह मिली' श्री यादव ने सवाल उठाया कि एक मामूली ठेकेदार आखिर कई विभागों के टेंडर अपनी मर्जी से कैसे मैनेज करता रहा। उन्होंने पूछा कि उसे वरिष्ठ अधिकारियों और सत्ता के शीर्ष स्तर से कथित संरक्षण किसके इशारे पर मिला और सरकारी निगरानी व्यवस्था इतने वर्षों तक निष्क्रिय क्यों रही। 'चार्जशीट में बड़े नाम क्यों गायब' राजद नेता ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों की चार्जशीट में केवल चुनिंदा लोगों को शामिल किया गया है जबकि कथित तौर पर बड़े जिम्मेदार लोगों के नाम सामने नहीं आए। उन्होंने पूछा कि क्या राजनीतिक दबाव के कारण प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है।उन्होंने दावा किया कि जांच में टेंडर और बिल पास कराने के बदले तय कमीशन की व्यवस्था सामने आई है। यदि ऐसा है तो भ्रष्टाचार पर सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति सिर्फ दावा बनकर रह जाती है। ई-टेंडरिंग सिस्टम पर भी सवाल नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि जब राज्य में सभी सरकारी ठेके ई-टेंडरिंग के जरिए दिए जाते हैं तो कथित टेंडर सिंडिकेट डिजिटल सिस्टम को कैसे प्रभावित करता रहा। उन्होंने पूरे ई-टेंडरिंग सिस्टम की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। न्यायिक जांच और मंत्रियों की जवाबदेही की मांग श्री यादव ने मांग की है कि रिशु श्री और उनसे जुड़ी कंपनियों को मिले सभी सरकारी ठेकों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने सवाल किया कि जिन विभागों में कथित घोटाला हुआ, उनके विभागीय मंत्रियों ने अब तक नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया। 'जनता जवाब चाहती है' नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बिहार की जनता जानना चाहती है कि हजारों करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में असली जिम्मेदार कौन हैं। उन्होंने सरकार से आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।