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पटना। बिहार सरकार ने नीट पेपर लीक विरोधी छात्र आंदोलन को लेकर यू-टर्न लेते हुए 26 जुलाई की शाम छह बजे तक आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने तथा उनके खिलाफ कोई नई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आज ऐलान किया। दर्ज एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया होगी शुरू गृह विभाग के विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह के हस्ताक्षर से सोमवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि नीट पेपर लीक के विरोध में हुए आंदोलन के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का कहना है कि 26 जुलाई की शाम छह बजे तक आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई नई कार्रवाई नहीं होगी। 600 छात्रों को हिरासत, 247 गिरफ्तार नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान बिहार पुलिस ने करीब 600 छात्रों को हिरासत में लिया , जबकि पटना समेत आठ जिलों में 247 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, पटना में दो मामले दर्ज हुए और 86 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 30 महिलाओं और 30 नाबालिगों को बाद में छोड़ दिया गया। छपरा में चार एफआईआर दर्ज कर 56 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि सीवान में तीन एफआईआर में 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया। भागलपुर में दर्ज मामले में नामजद 49 आरोपियों में से 41 गिरफ्तार हुए। वहीं, सीतामढ़ी में चार एफआईआर दर्ज कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। तेजस्वी बोले- हमारी अल्टीमेटम से झुकी सरकार विधानसभा में प्रतिपक्ष एवं राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने सरकार के फैसले पर कहा कि सरकार को विपक्ष की चेतावनी के आगे झुकना पड़ा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा था। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुकदमे वापस लेने का पत्र तो जारी कर दिया लेकिन यदि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उनके पूरे पत्र को ध्यान से पढ़ते तो छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी फैसला लेते। पहले दी थी आंदोलन की चेतावनी गौरतलब है कि श्री यादव ने इससे पहले रविवार को हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया था कि छात्र आंदोलन खत्म होने के बाद भी छात्रों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सीधे गोली चलाई और एके-47 का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव को जेल भेजा गया, पटना समेत कई जिलों में छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ और हजारों छात्रों के नाम एफआईआर में शामिल किए गए। उन्होंने कहा था कि यदि मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो विपक्ष बड़ा आंदोलन करेगा। नेहा बोरा ने की सभी गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की मांग इधर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी सोमवार को पटना पहुंचीं और बेऊर जेल में बंद छात्र नेताओं तथा आंदोलनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सरकार केवल मुकदमे वापस लेने की घोषणा कर अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो सकती। सभी गिरफ्तार छात्रों और छात्र नेताओं को भी तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। 'दिल्ली से बड़ा आंदोलन होगा' सुश्री बोरा ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान पुलिस ने छात्रों के साथ दुर्व्यवहार किया, गालियां दीं, एनकाउंटर की धमकी दी और जाति-धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं। उन्होंने बताया कि उनकी कानूनी टीम सभी गिरफ्तार छात्रों की रिहाई के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बेऊर जेल में जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव और पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष शांतनु शेखर से भी मुलाकात की। आइसा अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि बिहार की जेलों में बंद छात्रों को जल्द रिहा नहीं किया गया तो राज्य में दिल्ली के जंतर-मंतर से भी बड़ा छात्र आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र बिहार का रुख करेंगे और सरकार के खिलाफ व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन चलाया जाएगा।



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