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मोतिहारी। नेपाल में लगातार हुई बारिश और गंडक बराज से करीब 5.45 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी ने पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। अरेराज से बगहा तक नदी के बढ़ते जलदबाव ने तटबंधों की सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा ले ली है। पूर्वी चंपारण के अरेराज में दो बांध टूटे तो पश्चिम चंपारण के बगहा-1 में चंपारण तटबंध का हिस्सा ध्वस्त हो गया। इसके बाद दर्जनों गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा है। अरेराज में दो बांध टूटे, छह पंचायतों के गांवों में पानी पूर्वी चंपारण के अरेराज में सोमवार रात से गंडक का जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हुआ। पानी के दबाव में सरैया पांडेय टोला के समीप मनरेगा से निर्मित रिंग बांध टूट गया। इसके बाद सखवा-सिकटिया में भी पुराने बांध के टूटने की सूचना है। दोनों स्थानों से पानी का बहाव रिहायशी इलाकों और खेतों की ओर बढ़ने लगा। अरेराज प्रखंड की छह पंचायतों के करीब दो दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। नवादा पंचायत के वार्ड 7 से 13 तक करीब तीन हजार परिवार, चटिया बड़हरवा के तीन वार्डों में करीब पांच हजार लोग तथा मिश्रौलिया पंचायत के वार्ड 7, 9 और 10 में दो हजार से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। सरैया पंचायत के वार्ड 2, 3 और 4, चटिया चितमनपुर के बिंदटोली, नगदाहा तथा पिपरा पंचायत के बिंदटोली समेत कई अन्य इलाकों में भी पानी फैल गया है। घरों में पानी प्रवेश करने के साथ सैकड़ों एकड़ में लगी धान, ईख और अन्य फसलों के डूबने से किसानों के सामने नुकसान का संकट खड़ा हो गया है। कहीं राहत पहुंची, कहीं नाव और रसोई का इंतजार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था को लेकर तस्वीर एक जैसी नहीं है। नवादा पंचायत में तीन स्थानों पर सामुदायिक रसोई, जनरेटर और नाव की व्यवस्था किए जाने की जानकारी है। मिश्रौलिया में भी सामुदायिक रसोई संचालित किए जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, चटिया बड़हरवा पंचायत के मुखिया चांदसी यादव ने दावा किया कि मंगलवार शाम तक प्रभावित लोगों के लिए प्रशासन की ओर से न तो नाव उपलब्ध कराई गई थी और न ही सामुदायिक रसोई शुरू हुई थी। उनके अनुसार करीब पांच हजार लोग प्रभावित हैं और कई परिवार मवेशियों के साथ चंपारण तटबंध तथा अन्य ऊंचे स्थानों पर त्रिपाल-प्लास्टिक लगाकर रह रहे हैं। बाढ़ का पानी स्कूलों तक पहुंचने के बाद नौ विद्यालयों को आसपास के दूसरे विद्यालयों में स्थानांतरित करना पड़ा है। बगहा में भी तटबंध टूटा, हाईवे तक पहुंचा पानी पश्चिम चंपारण के बगहा-1 में भी गंडक के दबाव ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। सोमवार शाम करीब 8:30 बजे खैरटवा के पास चंपारण तटबंध टूट गया। इसके बाद पानी तेजी से खैरटवा, पिपरिया, सिंगारी गढ़वा, रजवटिया, चखनी, बड़गांव, छोटकीपट्टी, एकडेरवा और डुमरिया समेत आसपास के इलाकों की ओर फैलने लगा। बगहा-वाल्मीकिनगर मार्ग पर भी पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित हुआ है। चखनी रजवटिया से रतवल तक करीब 14 किलोमीटर लंबा मार्ग इसी तटबंध से जुड़ा है। स्थानीय स्तर पर इन इलाकों की बड़ी आबादी के बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार पश्चिम चंपारण के 10 प्रखंडों के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। बगहा-वाल्मीकिनगर हाईवे पर कई स्थानों पर पांच से छह फीट तक पानी बहने की सूचना है, जिससे सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तीन दशक बाद गंडक का ऐसा उफान स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अरेराज क्षेत्र में करीब तीन दशक बाद गंडक का इतना विकराल रूप देखने को मिला है। नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से चंपारण तटबंध पर भी कई स्थानों पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में तटबंधों की निगरानी और कमजोर हिस्सों की सुरक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट रखा गया है। प्रभावित लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, नाव उपलब्ध कराने, राहत सामग्री पहुंचाने और सामुदायिक रसोई संचालित करने की कार्रवाई की जा रही है। गंडक के साथ बागमती भी उफान पर उत्तर बिहार में बाढ़ का संकट केवल गंडक तक सीमित नहीं है। मुजफ्फरपुर के कटरा में बागमती का पानी बकुची पुल पर चढ़ गया है, जिससे 16 पंचायतों की बड़ी आबादी का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है। कटौझा में बागमती नदी खतरे के निशान से करीब 0.90 मीटर ऊपर बह रही है। गंडक और बागमती समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि ने उत्तर बिहार में एक साथ कई मोर्चों पर बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। फिलहाल दोनों चंपारण में प्रशासन की निगाह तटबंधों, नदी के जलस्तर और निचले इलाकों में तेजी से फैल रहे पानी पर टिकी है।



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