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कटिहार। गंगा और कोसी नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर से बिहार में कटिहार जिले के बरारी एवं सेमापुर क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है, जहां मोहनाचांदपुर पंचायत के कुंडी गांव के वार्ड संख्या 10 से 17 तक पानी फैलने से 2000 से अधिक घर प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में ग्रामीण घर छोड़कर कुंडी पुल पर शरण लेने को मजबूर हैं। बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों के सामने भोजन, स्वच्छ पेयजल और दवाओं की समस्या खड़ी हो गई है। मवेशियों के लिए सुरक्षित स्थान और चारे का इंतजाम करना भी मुश्किल होता जा रहा है। आठ वार्ड पानी से घिरे, पुल पर कट रही जिंदगी कुंडी गांव के आठ वार्डों में बाढ़ का पानी पूरी तरह फैल चुका है। घरों के आसपास पानी भरने के बाद कई परिवार जरूरी सामान लेकर ऊंचे स्थानों की ओर निकल गए। बड़ी संख्या में लोगों ने कुंडी पुल को अस्थायी ठिकाना बना लिया है। खुले में रह रहे परिवारों को भोजन और पेयजल के साथ बारिश, बीमारी और सुरक्षा की चिंता भी सता रही है। सड़कों पर पानी, नाव बनी आवाजाही का सहारा बाढ़ के कारण कई गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हो गया है। पानी से घिरे क्षेत्रों में ग्रामीणों की आवाजाही अब नावों पर निर्भर हो गई है। दैनिक जरूरत का सामान लाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और पशुओं के लिए चारा जुटाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हर साल डूबती हैं कई पंचायतें बरारी प्रखंड की कांतनगर, बिशनपुर, बैसागोविंदपुर, सुखासन, चित्तौड़िया, बासागढ़ा, दुर्गापुर और गुरमेला सहित कई पंचायतों में लगभग हर वर्ष बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। गंगा और कोसी का जलस्तर बढ़ते ही इन पंचायतों के निचले इलाकों में पानी फैलने लगता है। इससे बड़ी आबादी प्रभावित होती है और ग्रामीणों के सामने आवागमन, भोजन, पेयजल तथा पशुचारे का संकट खड़ा हो जाता है। ग्रामीणों का सवाल—हर साल बाढ़, स्थायी समाधान कब ग्रामीण राजा कुमार, रवि कुमार यादव और रघुनंदन पासवान सहित अन्य लोगों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ आने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से तट सुरक्षा, सुरक्षित आवागमन और आपदा के समय तत्काल राहत उपलब्ध कराने के लिए दीर्घकालीन व्यवस्था बनाने की मांग की है। ‘अब तक शुरू नहीं हुआ राहत शिविर’ पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि गयाराम के अनुसार, बड़ी संख्या में परिवारों के घर छोड़ने के बावजूद सरकार की ओर से अभी तक राहत शिविर शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत शिविर खोलने और प्रभावित लोगों के लिए भोजन, स्वच्छ पानी, दवा एवं अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही मवेशियों के लिए चारे और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करने को कहा है। प्रशासन का दावा—अलर्ट मोड में टीमें, दो नावें चल रहीं अंचल पदाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि मोहनाचांदपुर में फिलहाल दो नावों का परिचालन कराया जा रहा है। प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य की रफ्तार बढ़ाई जाएगी। फिलहाल बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीणों की नजर तत्काल राहत, सुरक्षित आश्रय और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।



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