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पटना। बिहार के पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में जमीन खरीदने या बेचने की प्लानिंग कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया है कि कोर एरिया समेत पूरी टाउनशिप में जमीन की खरीद-बिक्री और ट्रांसफर पर पहले लगाई गई रोक अब प्रभावी नहीं है और लोग पहले की तरह जमीन का लेन-देन कर सकेंगे। जमीन की डील पर अब ‘नो बैन’ नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण को लेकर पहले लागू प्रतिबंध अब खत्म हो चुका है। इस फैसले की जानकारी विभाग ने समाहर्ता-सह-जिला निबंधक, पटना को भी दे दी है। कोर एरिया में भी खरीद-बिक्री की छूट इस फैसले की सबसे अहम बात यह है कि जमीन की खरीद-बिक्री से रोक सिर्फ किसी खास हिस्से में नहीं बल्कि पूरी टाउनशिप से हटाई गई है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि कोर एरिया भी इसके दायरे में शामिल है। यानी वहां भी जमीन खरीदी-बेची और हस्तांतरित की जा सकेगी। आखिर क्यों लगी थी रोक और अब क्या बदला पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की विकास योजना का प्रारूप प्रकाशित होने के बाद विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इसी अधिसूचना के जरिए टाउनशिप के विशेष क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर पहले लगाई गई रोक हटा दी गई है। जमीन मालिकों की बड़ी टेंशन खत्म रोक को लेकर क्षेत्र के भू-स्वामियों और आम लोगों के बीच लंबे समय से कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई थी कि जमीन खरीदी या बेची जा सकती है या नहीं। अब सरकार के स्पष्टीकरण के बाद तस्वीर साफ हो गई है कि टाउनशिप में जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर कोई रोक प्रभावी नहीं है। ‘डेवलपमेंट भी, पब्लिक इंटरेस्ट भी’ मंत्री श्री मिश्रा ने कहा कि सरकार विकास की रफ्तार बढ़ाने के साथ यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि इससे किसी व्यक्ति के हित प्रभावित न हों। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है। जमीन मालिकों और खरीदारों के लिए क्या है बॉटम लाइन सीधी बात यह है कि पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के कोर एरिया समेत पूरे क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और ट्रांसफर किया जा सकता है। सरकार के इस फैसले से जमीन मालिकों और संभावित खरीदारों के बीच बनी कन्फ्यूजन दूर होने की उम्मीद है। साथ ही टाउनशिप क्षेत्र में जमीन से जुड़े लेन-देन का रास्ता भी साफ हो गया है।