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पटना। बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने गुरुवार को पटना, कटिहार और सारण स्थित तीन ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें अब तक 5.70 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण और निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं जबकि जांच में उनकी पत्नी के नाम सिलीगुड़ी के महंगे व्यावसायिक इलाके में खरीदी गई 92 डिसमिल जमीन का भी खुलासा हुआ है। आय से 88 फीसदी अधिक संपत्ति का आरोप ब्यूरो ने बताया कि ग्रामीण कार्य विभाग के जांच एवं गुणवत्ता नियंत्रण प्रमंडल, छपरा में कार्यरत कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ एक करोड़ 10 लाख 96 हजार 883 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। इस संबंध में 13 अक्टूबर 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या 121/26 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। निगरानी के अनुसार, चंद्रशेखर सिंह, उनकी पत्नी श्वेता कुमारी और परिजनों के नाम 14 अचल संपत्तियों का पता चला है, जिनका कुल मूल्य एक करोड़ 79 लाख 41 हजार 883 रुपये है। इसके अलावा 16 लाख 55 हजार रुपये मूल्य की पांच चल संपत्तियां भी पाई गई हैं। यह संपत्ति उनकी कुल ज्ञात आय से करीब 88 प्रतिशत अधिक है। तीन शहरों में एक साथ तलाशी मामले की जांच के दौरान पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय से सर्च वारंट प्राप्त करने के बाद ब्यूरो की तीन टीमों ने गुरुवार को चंद्रशेखर सिंह से जुड़े तीन ठिकानों पर तलाशी शुरू की। इनमें पटना के जगदेव पथ स्थित सरयुग वमिका अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर 103, कटिहार के लोहिया नगर स्थित पैतृक आवास और सारण जिले में स्थित उनका कार्यालय शामिल हैं। तलाशी के दौरान संपत्तियों, निवेश और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। सिलीगुड़ी में पत्नी के नाम 92 डिसमिल जमीन जांच में सामने आई संपत्तियों में सिलीगुड़ी के महंगे व्यावसायिक इलाके की जमीन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। निगरानी के मुताबिक, वर्ष 2021 में चंद्रशेखर सिंह ने अपनी पत्नी श्वेता कुमारी के नाम 10 अलग-अलग डीड के जरिए कुल 92 डिसमिल जमीन खरीदी थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस जमीन का उल्लेख कार्यपालक अभियंता की ओर से जमा किए गए वार्षिक संपत्ति विवरण में नहीं किया गया था। जमीन खरीदने के समय चंद्रशेखर सिंह ग्रामीण कार्य विभाग में फारबिसगंज में सहायक अभियंता के पद पर तैनात थे। जांच के दौरान कुछ अन्य डीड भी मिले हैं, जिनकी पड़ताल की जा रही है। नकदी के साथ सोने-चांदी के आभूषण भी मिले तलाशी अभियान के दौरान अब तक 5 लाख 70 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा सोने और चांदी के आभूषण भी मिले हैं। हालांकि, इन आभूषणों का मूल्य अभी स्पष्ट नहीं है। निगरानी ब्यूरो की ओर से इनका मूल्यांकन कराया जा रहा है। तलाशी में बैंक खातों, शेयरों और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में निवेश से संबंधित कागजात भी बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर निवेश और संपत्ति अर्जित करने के स्रोतों की जांच की जा रही है। पटना में 3 बीएचके, कटिहार में 2 बीएचके फ्लैट निगरानी की जांच में चंद्रशेखर सिंह से जुड़ी आवासीय संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। पटना में उनका तीन बेडरूम वाला 3 बीएचके फ्लैट है। वहीं, कटिहार स्थित पैतृक आवास में भी 2 बीएचके फ्लैट का पता चला है। ब्यूरो इन संपत्तियों के साथ अन्य अचल संपत्तियों और निवेश से संबंधित अभिलेखों की जांच कर रहा है। बांका से छपरा तक रही है तैनाती ब्यूरो ने चंद्रशेखर सिंह की पिछली पदस्थापनाओं विवरण देते हुए बताया कि वे वर्ष 2014 से 2017 तक बांका में सहायक अभियंता रहे। इसके बाद 2017 से 2020 तक बायसी और 2020 से 2024 तक फारबिसगंज में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत रहे। फरवरी 2024 से फरवरी 2025 तक उनकी तैनाती भागलपुर में गुणवत्ता लैब नियंत्रण में रही। इसके बाद फरवरी 2025 से जून 2026 तक वे किशनगंज-2 में कार्यपालक अभियंता रहे। जून 2026 से वे ग्रामीण कार्य विभाग के गुणवत्ता नियंत्रण प्रमंडल, छपरा में पदस्थापित हैं। तलाशी जारी, और खुलासों की संभावना ब्यूरो ने बताया कि चंद्रशेखर सिंह और उनके परिजनों के नाम अर्जित संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।सिलीगुड़ी में खरीदी गई जमीन, अन्य डीड, बैंक और शेयर निवेश तथा बरामद आभूषणों के मूल्यांकन के बाद संपत्तियों की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामले का अनुसंधान और तीनों ठिकानों पर तलाशी की कार्रवाई जारी है।