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सीवान। बिहार में सीवान जिले के जामो थाना क्षेत्र के आलमापुर गांव में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद से लापता मुस्कान सिद्दीकी का शव मंगलवार को ध्वस्त मकान की रसोई से बरामद होने के साथ ही हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई जबकि तीन दिन बाद शव मिलने से राहत एवं बचाव अभियान की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। तीन दिन तक जिंदा लौटने की उम्मीद, फिर मिली मौत की खबर आलमापुर में विस्फोट के बाद जब मकान मलबे में बदल गया, तब स्वर्गीय आजाद अहमद की पुत्री मुस्कान सिद्दीकी का कोई पता नहीं चल सका था।हादसे में कई लोगों की मौत की खबर के बीच परिजन मुस्कान के सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। उसकी तलाश भी जारी थी लेकिन मंगलवार को यह उम्मीद टूट गई। बचाव अभियान के दौरान ध्वस्त मकान की रसोई से मुस्कान का शव बरामद हुआ। इस खबर के सामने आते ही पहले से हादसे का दर्द झेल रहे परिवार पर एक और दुख का पहाड़ टूट पड़ा। जिस मकान में चल रहा था रेस्क्यू, वहीं तीन दिन बाद मिला शव मुस्कान की बरामदगी ने हादसे के बाद चलाए गए राहत एवं बचाव अभियान को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मकान में विस्फोट के बाद से लापता युवती की तलाश की जा रही थी, उसी मकान की रसोई में उसका शव तीन दिन बाद कैसे मिला? क्या बचाव दल ने मलबे के सभी हिस्सों की व्यवस्थित तरीके से जांच की थी? क्या रसोई तक पहुंचने और वहां तलाशी लेने में कोई बाधा थी? यदि ऐसा था, तो उस बाधा को दूर करने में कितना समय लगा? इन सवालों का जवाब सामने आना अभी बाकी है। हालांकि, केवल देर से शव मिलने के आधार पर बचाव अभियान में लापरवाही साबित नहीं होती। इसके लिए तलाशी अभियान की परिस्थितियों और अपनाई गई प्रक्रिया की जांच जरूरी है। छह लोगों की मौत, आलमापुर में गहराया मातम मुस्कान का शव मिलने के बाद आलमापुर विस्फोट में मृतकों की संख्या छह हो गई है। हादसे में जान गंवाने वालों में अमरुद्दीन अहमद, इशरत सिद्दीकी, खुशबू सिद्दीकी, अरशद सिद्दीकी, राजकुमार सिंह उर्फ भोला और मुस्कान सिद्दीकी शामिल हैं। मृतक राजकुमार सिंह उर्फ भोला बड़हरिया थाना क्षेत्र के सदरपुर गांव के रहने वाले थे। एक ही हादसे में छह जिंदगियां खत्म होने से कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस घर में बेटियों की शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब मातम का माहौल है। हादसे के साथ बचाव अभियान की भी जांच जरूरी आलमापुर की इस त्रासदी ने दो अहम सवाल सामने ला दिए हैं। पहला, रिहायशी इलाके में पटाखों का निर्माण और भंडारण किस तरह हो रहा था और उसकी निगरानी की क्या व्यवस्था थी? दूसरा, विस्फोट के बाद लापता लोगों की तलाश के लिए चलाए गए अभियान में किन परिस्थितियों के कारण मुस्कान का शव तीन दिन बाद बरामद हुआ? मलबे में दबे शव तक पहुंचने में हुई देरी की वास्तविक वजह स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि बचाव अभियान को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब मिल सके।



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