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पटना। बिहार में बाढ़ की निगरानी, जल प्रबंधन, खेती और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब अंतरिक्ष आधारित तकनीक और वैज्ञानिक आंकड़ों का सहारा लिया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को यहां डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी में आयोजित दो दिवसीय ‘स्पेस एप्लीकेशन एडॉप्शन वर्कशॉप-2026’ में इसकी जरूरत पर जोर देते हुए वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों से बिहार की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी तकनीकों को जमीन पर उतारेगी, जिनका सीधा फायदा आम लोगों, किसानों और प्रशासनिक व्यवस्था को मिल सके। ‘टेककनेक्ट’ पोर्टल लॉन्च, दो संस्थानों के बीच समझौता श्री चौधरी ने कार्यशाला के दौरान ‘टेककनेक्ट’ पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके साथ ही बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (बीआईआरएसएसी) और सर्वे ऑफ इंडिया (एसओआई) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य वैज्ञानिक आंकड़ों और अंतरिक्ष आधारित तकनीकों के इस्तेमाल में आपसी सहयोग बढ़ाना है, ताकि सरकारी योजनाओं की निगरानी और उनके क्रियान्वयन को बेहतर बनाया जा सके। बिहार में बारिश 32 प्रतिशत कम, फिर भी नदियों में बढ़ा पानी मुख्यमंत्री ने बिहार की बाढ़ संबंधी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में लगभग 32 प्रतिशत कम बारिश होने के बावजूद बाहरी क्षेत्रों से आने वाले पानी का असर गंगा, सोन और गंडक जैसी नदियों के जलस्तर पर देखने को मिला। उन्होंने बताया कि नेपाल के साथ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाला जल प्रवाह बिहार के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक पूर्वानुमान, नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी और बेहतर जल प्रबंधन जरूरी है। अंतरिक्ष तकनीक और रिमोट सेंसिंग की मदद से बाढ़ की स्थिति का आकलन करने और समय रहते प्रभावी कदम उठाने में सहायता मिल सकती है। गंगा के पानी का सालभर इस्तेमाल करने पर जोर श्री चौधरी ने बिहार में उपलब्ध नदी जल के बेहतर उपयोग की जरूरत भी बताई और कहा कि विशेष रूप से गंगा के पानी का सालभर पेयजल और सिंचाई के लिए उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस प्रयास होने चाहिए। इसके लिए वैज्ञानिक अध्ययन, योजनाबद्ध जल प्रबंधन और संबंधित राज्यों के बीच बेहतर तालमेल को उन्होंने आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के जरिए जल संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने के साथ कृषि योजनाओं को भी बेहतर बनाया जा सकता है। बिहार में बसेंगी 12 नई टाउनशिप मुख्यमंत्री ने राज्य में नियोजित शहरी विकास की योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि बिहार में ऐतिहासिक नामों और विरासत से प्रेरित 12 नई टाउनशिप विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि नए शहरी क्षेत्रों की योजना बनाते समय वैज्ञानिक अध्ययन और आधुनिक तकनीक का उपयोग महत्वपूर्ण होगा। इससे संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और विकास कार्यों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इंजीनियरिंग की फीस 10 रुपये, पॉलिटेक्निक की पांच रुपये श्री चौधरी ने तकनीकी शिक्षा को लेकर कहा कि बिहार सरकार युवाओं के लिए इसकी पढ़ाई सुलभ बनाने पर जोर दे रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में 10 रुपये और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 5 रुपये फीस की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य युवाओं को तकनीकी शिक्षा हासिल करने के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान प्राचीन काल से ज्ञान और शिक्षा के केंद्र के रूप में रही है। आर्यभट्ट और आचार्य चाणक्य जैसी विभूतियों की विरासत को आधुनिक विज्ञान और नवाचार से जोड़कर राज्य को आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रयोगशाला से निकलकर खेतों और गांवों तक पहुंचे तकनीक मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों और तकनीकी संस्थानों से कहा कि वे ऐसी तकनीक विकसित करें, जो बिहार की वास्तविक जरूरतों को पूरा कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए एप्लीकेशन केवल प्रदर्शन या तकनीकी प्रयोग तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उनका इस्तेमाल खेती, बाढ़ प्रबंधन, जल संसाधन, सरकारी सेवाओं और विकास योजनाओं में होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने और उपयोगी तकनीकी समाधानों को अपनाने का निर्देश दिया। विकसित बिहार के लिए विज्ञान और नवाचार जरूरी श्री चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवाचार के बिना विकास की रफ्तार बढ़ाना मुश्किल है। सरकार का प्रयास है कि नई तकनीक के इस्तेमाल से प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाया जाए। दो दिवसीय कार्यशाला की थीम ‘एम्पावरिंग गवर्नेंस : लीवरेजिंग स्पेस इनेबल्ड सॉल्यूशंस फॉर ए प्रोग्रेसिव बिहार’ रखी गई है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष आधारित समाधानों के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त बनाना है। कार्यशाला में विशेषज्ञों और अधिकारियों ने रखे विचार कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, इन-स्पेस के संयुक्त सचिव अनुपम आनंद, विभागीय सचिव हिमांशु शर्मा तथा इन-स्पेस के निदेशक रणनीति एवं योजना डीबी खोत ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जितेन्द्र राणा, जिलाधिकारी कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य प्रतिभागी मौजूद रहे।