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पटना। बिहार के बहुचर्चित 32 साल पुराने अलकतरा घोटाला के एक मामले में आरोपित एक ट्रांसपोर्टर ने आज अपना अपराध कबूल कर लिया, जिसके बाद पटना की एक विशेष अदालत ने उसे एक वर्ष चार माह 18 दिन के कारावास के साथ 29 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। केंद्रिया जांच ब्यूरो (सीबीआई ) की विशेष अदालत संख्या दो के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने मामले में सुनवाई के दौरान ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह उर्फ डी एन सिंह की ओर से गुनाह कबूल करने के लिए दाखिल किए गए आवेदन पर सुनवाई और दोष स्वीकारोक्ति बयान दर्ज करने के बाद उसे दोषी करार देते हुए भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत 1 वर्ष 4 महीने 18 दिन के कारावास की सजा के साथ 29 लाख रुपये का जुर्माना भी किया। कारावास की सजा जेल में बिताई गई अवधि में समायोजित की गई जबकि दोषी ने 29 लाख रुपए का जुर्माना अदालत में जमा कर दिया। इसके बाद उसका मुकदमा निष्पादित कर दिया गया। दूसरी ओर इसी मुकदमे के दो अन्य आरोपितों तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन और तत्कालीन डायरेक्टर परचेज एंड ट्रांसपोर्ट केदार पासवान के खिलाफ मामले में अंतिम बहस जारी है। मामले के विशेष लोक अभियोजक राकेश दुबे ने बताया कि मामला वर्ष 1994 का था। आरोप के अनुसार, एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत दोषी ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह ने बरौनी रिफाइनरी से 494.68 मीट्रिक टन अलकतरा का उठाव किया था, जिसे जमुई पथ निर्माण प्रमंडल में पहुंचाना था लेकिन उक्त अलकतरा गायब कर दिया गया। गायब अलकतरा की कीमत 28 लाख 43 हजार 555 रुपये थी। मामले की मूल प्राथमिकी बरौनी थाने में वर्ष 1996 में दर्ज की गई थी। बाद में सीबीआई ने इस मामले की जांच पटना उच्च न्यायालय के आदेश से अपने हाथ में ली थी और आरसी 9(S) 1997 के रूप में अपनी प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के बाद सीबीआई ने इस मामले में छह अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। आरोपितों में तिरुपति ट्रांसपोर्ट के मालिक दूधेश्वर नाथ सिंह, तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन, तत्कालीन डायरेक्टर परचेज एंड ट्रांसपोर्ट केदार पासवान, तत्कालीन इंजीनियर इन चीफ डी एन बैठा, तत्कालीन उपनिदेशक मुजतबा अहमद और मदन मोहन प्रसाद शामिल थे। मामले की सुनवाई के दौरान डी एन बैठा, मुजतबा अहमद और मदन मोहन प्रसाद की मृत्यु हो गई । वर्तमान में अब मुकदमा मोहम्मद इलियास हुसैन और केदार पासवान के खिलाफ अंतिम सुनवाई के लिए लंबित है।



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