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नई दिल्ली/पटना। उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह को पटना उच्च न्यायालय से मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें 01 दिसंबर तक आत्मसमर्पण कर जेल लौटने और बिहार सरकार को चार महीने के भीतर मामले की जांच पूरी करने का आदेश दिया है। परिवार में शादी का हवाला, सरेंडर के लिए मिली मोहलत उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान श्री अनंत सिंह के वकील ने अदालत को बताया कि उनके परिवार में 25 नवंबर को शादी है। इस बात को ध्यान में रखते हुए अदालत ने श्री सिंह को एक दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का समय दिया। साथ ही बिहार सरकार को चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया। जांच के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय से मिली थी जमानत, अब लौटना होगा जेल गौरतलब है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद श्री सिंह को जेल भेजा गया था। मार्च 2026 में पटना उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे। अब उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें दोबारा जेल लौटना होगा। इस मामले में उनकी जमानत रद्द करने की मांग को लेकर सर्वोच्च अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। चुनाव प्रचार में भिड़े थे दो पक्ष, गई थी दुलारचंद की जान मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान श्री सिंह जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के टिकट पर मोकामा सीट से मैदान में थे। दूसरी ओर, दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे थे। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद हुई हिंसा में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। इस हत्याकांड में अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने मोकामा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। जदयू से भी हो चुकी है अनंत सिंह की छुट्टी उच्चतम न्यायालय के आदेश से पहले श्री सिंह राजनीतिक मोर्चे पर भी झटका लग चुका है। जदयू ने इस वर्ष 24 अक्टूबर को उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी ने उन पर अनुशासनहीनता, वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल और विधान परिषद चुनाव में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के विरोध में प्रचार करने के आरोप लगाए थे। श्री सिंह पर पार्टी लाइन से अलग जाकर जन सुराज के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने का भी आरोप था। पत्नी नीलम देवी भी पार्टी से निष्कासित जदयू ने अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी पार्टी से छह साल के लिए बाहर कर दिया था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने निष्कासन का आदेश जारी किया था। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष से श्री सिंह की सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा भी की गई थी। सरकारी आवास खाली करने का भी नोटिस जदयू से निष्कासन के बाद श्री सिंह के परिवार की मुश्किलें और बढ़ीं। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने नीलम देवी को पटना के 1, मॉल रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया। नोटिस में उन्हें 25 नवंबर 2026 तक आवास खाली करने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा नीलम देवी को 20 सूत्री समिति के सदस्य पद से भी हटा दिया गया और उनसे राज्य मंत्री का दर्जा वापस ले लिया गया।



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