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मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में न्यायिक अभिरक्षा में 52 वर्षीय बंदी सुधीश कुमार की मौत के बाद गिरफ्तारी से लेकर मेडिकल जांच, न्यायालय में पेशी और जेल पहुंचने के बाद अचानक अस्पताल भेजे जाने तक का पूरा घटनाक्रम जांच के दायरे में आ गया है। मोतिहारी सदर अस्पताल में रविवार को इलाज के दौरान सुधीश की मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस पर मारपीट और रुपये मांगने के आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जांच में उसे शारीरिक रूप से स्वस्थ पाया गया था। 10 लीटर शराब के साथ गिरफ्तारी का दावा पुलिस सूत्रों ने बताया कि कोटवा थाना क्षेत्र के बड़हरवा कला निवासी सुधीश कुमार को 29 सितंबर को उत्पाद अधिनियम के तहत दर्ज कांड संख्या 405/25 में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा है कि उसके पास से 10 लीटर शराब बरामद की गई थी।इसके अगले दिन यानी 30 सितंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कोटवा में उसकी मेडिकल जांच कराई गई। मेडिकल पर्ची में क्या-क्या दर्ज चिकित्सा पर्ची संख्या 2845 में सुधीश का वजन 50 किलोग्राम , रक्तचाप 140/80 और नाड़ी की दर 78 दर्ज की गई। इसी पर्ची में ‘सीवियर अल्कोहोलिक ट्रेमर’ का उल्लेख है और साथ ही उसे ‘अदरवाइज फिजिकली फिट’ भी दर्ज किया गया। यही मेडिकल रिकॉर्ड अब मामले में महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। ‘सीवियर अल्कोहोलिक ट्रेमर’ का क्या मतलब ‘सीवियर अल्कोहोलिक ट्रेमर’ का अर्थ शराब से संबंधित गंभीर कंपकंपी से है। यह शराब का सेवन अचानक बंद करने या उसमें काफी कमी आने के बाद होने वाले अल्कोहल विदड्रॉल के लक्षणों में शामिल हो सकता है। हालांकि, केवल ट्रेमर दर्ज होने से अल्कोहल विदड्रॉल की निश्चित अवस्था या उसकी गंभीरता तय नहीं की जा सकती। इसके लिए दूसरे लक्षणों, मेडिकल जांच और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड का भी मूल्यांकन जरूरी होता है। मेडिकल के बाद कोर्ट, फिर जेल पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, चिकित्सकीय परीक्षण के बाद सुधीश को ‘फिजिकली फिट’ पाया गया। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में मोतिहारी केंद्रीय कारा भेज दिया गया लेकिन जेल पहुंचने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। जेल पहुंचा तो डॉक्टर ने पाया अस्वस्थ मोतिहारी केंद्रीय कारा के अधीक्षक विजय अरोड़ा के मुताबिक, सुधीश को 30 सितंबर की देर शाम केंद्रीय कारा लाया गया था। कारा चिकित्सक ने शुरुआती जांच में उसकी तबीयत अस्वस्थ पाई और उसी रात इलाज के लिए उसे सदर अस्पताल भेज दिया गया।अस्पताल में इलाज चलता रहा लेकिन रविवार सुबह सुधीश की मौत हो गई। परिजनों ने लगाए मारपीट और 50 हजार मांगने के आरोप सुधीश की मौत के बाद उसके परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक के साढ़ू नारद राम ने आरोप लगाया कि गांव के चौकीदार ललन दास और राजकुमार सुधीश के घर पहुंचे थे और उस पर शराब पिलाने का दबाव बनाया। विरोध करने पर पुलिस कार्रवाई की धमकी देने और बाद में पुलिस द्वारा सुधीश के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है। मृतक के भतीजे पप्पू कुमार ने आरोप लगाया कि सुधीश के साथ घर और थाने दोनों जगह मारपीट हुई। परिजनों का यह भी दावा है कि उसे छोड़ने के लिए 50 हजार रुपये मांगे गए और रकम नहीं देने पर जेल भेज दिया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज पुलिस के मुताबिक, न्यायिक अभिरक्षा के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद सुधीश को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हुई। शव का नियमानुसार पोस्टमॉर्टम कराया गया है। अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर मौत के कारणों की जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर-2 को पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें 24 घंटे के भीतर जांच प्रतिवेदन सौंपने को कहा गया है। पुलिस के अनुसार, सुधीश के खिलाफ पहले भी कोटवा थाना में कांड संख्या 22/2019 के तहत उत्पाद अधिनियम का मामला दर्ज था और वह पहले जेल जा चुका था। सबसे बड़ा सवाल—‘फिट’ से ‘अस्वस्थ’ कैसे हुआ बंदी अब जांच में सबसे अहम सवाल 30 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर है। मेडिकल जांच में एक तरफ ‘सीवियर अल्कोहोलिक ट्रेमर’ दर्ज था, वहीं उसे ‘अदरवाइज फिजिकली फिट’ भी बताया गया। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया, लेकिन जेल पहुंचने पर कारा चिकित्सक ने उसे अस्वस्थ पाया और उसी रात अस्पताल भेजना पड़ा। ऐसे में जांच का प्रमुख बिंदु यह होगा कि ‘सीवियर अल्कोहोलिक ट्रेमर’ दर्ज होने के बावजूद उसे किस चिकित्सकीय आधार पर पेशी के लिए फिट माना गया और जेल पहुंचने के बाद उसकी हालत ऐसी क्यों मिली कि तत्काल अस्पताल भेजना पड़ा।



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