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सीवान। बिहार में सीवान जिले के प्रसिद्ध महेंद्रनाथ सरोवर को जैव विविधता विरासत स्थल (बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट) के रूप में नई पहचान दिलाने की कवायद तेज हो गई है। इस दिशा में गुरुवार को बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद, पटना की चार सदस्यीय टीम ने जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा से मुलाकात कर सरोवर की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता सर्वेक्षण और संरक्षण की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस पहल के तहत स्थानीय पंचायतों और समुदायों की भागीदारी से सरोवर की जैव विविधता को संरक्षित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। सरोवर की प्राकृतिक विरासत को सहेजने की तैयारी महेंद्रनाथ सरोवर को जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में चयनित करने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में सरोवर और उसके आसपास मौजूद जैव विविधता के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। बैठक में क्षेत्र में अब तक किए गए जैव विविधता सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर चर्चा हुई। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए संभावित संरक्षण उपायों पर भी विचार किया गया। पंचायतों की सहमति और स्थानीय लोगों की भागीदारी पर जोर सरोवर को विरासत स्थल के रूप में चयनित करने की प्रक्रिया में संबंधित ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) और स्थानीय निकायों से अनुशंसा प्राप्त करने पर चर्चा की गई। इस पहल में स्थानीय समुदाय को भी संरक्षण और प्रबंधन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है ताकि सरोवर की प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखने के प्रयासों में लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। पटना से पहुंची चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद की टीम में विषय क्षेत्र विशेषज्ञ अमरेश बिहारी झा, यंग प्रोफेशनल हर्षिता प्रकाश, इंटर्न दिवाकर कुमार और सुनंदा कुमारी शामिल थे। टीम ने जिलाधिकारी के साथ बैठक में सरोवर की जैव विविधता, सर्वेक्षण और विरासत स्थल के रूप में चयन की प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। विरासत स्थल बना तो संरक्षण को मिलेगी नई ताकत महेंद्रनाथ सरोवर को जैव विविधता विरासत स्थल का दर्जा मिलने से क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा के संरक्षण को नई दिशा मिल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर जैव विविधता के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ने की भी उम्मीद है। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों और स्थानीय समुदाय के सहयोग से संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।



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