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नई दिल्ली/पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व राज्यसभा सांसद और देश की प्रमुख सुरक्षा सेवा कंपनी सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (एसआईएस) के संस्थापक रवींद्र किशोर सिन्हा (आर.के. सिन्हा) का शुक्रवार को निधन हो गया। उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। बिहार के भोजपुर जिले के बहियारा गांव से निकलकर पत्रकारिता, कारोबार और राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले श्री सिन्हा लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से राजनीतिक और कारोबारी जगत में शोक है। श्री सिन्हा के पुत्र एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता ऋतुराज सिन्हा ने शुक्रवार को बताया, “मेरे पूज्य पिताजी, डॉ. रवीन्द्र किशोर सिन्हा जी आज हमें छोड़कर चिरनिद्रा में लीन हो गए हैं। नोएडा स्थित आवास पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।” उन्होंने अंतिम दर्शन एवं अंतिम यात्रा कार्यक्रम के बारे में बताया कि आज (30 अक्टूबर, 2026) शाम 7:00 बजे पार्थिव शरीर दिल्ली से पटना पहुंचेगा। पार्थिव शरीर को 31 अक्टूबर, 2026 को सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक अन्नपूर्णा भवन, पाटलिपुत्र में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शनिवार को दोपहर 12:30 बजे पार्थिव शरीर को अन्नपूर्णा भवन से दीघा घाट ले जाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार होगा। ब्रेन स्ट्रोक के बाद बिगड़ी थी तबीयत श्री सिन्हा पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे थे। उन्हें उम्र से जुड़ी बीमारियां थीं। पिछले साल जनवरी में ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी। बताया जाता है कि दिल्ली में एक बैठक में शामिल होने के बाद वह नोएडा जा रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकों को उनके मस्तिष्क की सर्जरी करनी पड़ी थी। उनका इलाज सिंगापुर में भी कराया गया। ब्रेन स्ट्रोक के बाद वह लंबे समय तक कोमा में रहे। शुक्रवार को उनके निधन की खबर सामने आई। हालांकि, मृत्यु के सटीक कारण को लेकर अभी आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। पटना लाया जाएगा पार्थिव शरीर श्री सिन्हा का बिहार से गहरा जुड़ाव रहा। उनका जन्म भोजपुर जिले के बहियारा गांव में हुआ था। वह लंबे समय तक बिहार की सामाजिक, राजनीतिक और कारोबारी गतिविधियों से जुड़े रहे। उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर को पटना लाने की तैयारी की जा रही है। 250 रुपये महीने की नौकरी से शुरू हुआ सफर श्री सिन्हा की जिंदगी का सफर संघर्ष और कामयाबी की अनोखी कहानी रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पटना में एक पत्रकार के रूप में की थी। उस दौर में उनकी मासिक कमाई करीब 250 रुपये थी। पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले श्री सिन्हा ने आगे चलकर सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में ऐसा कारोबार खड़ा किया, जिसकी पहचान देश के बड़े व्यावसायिक संस्थानों में होने लगी। पांच दशक से अधिक समय में उनकी स्थापित कंपनी एसआईएस शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी बन गई। इसका कुल राजस्व करीब 16 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। जेपी की एक सलाह से बदली जिंदगी श्री सिन्हा के कारोबारी सफर की शुरुआत के पीछे समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की एक सलाह थी। वर्ष 1974 में श्री सिन्हा ने पटना में एसआईएस की स्थापना की। जयप्रकाश नारायण ने उन्हें सेना से सेवानिवृत्त लोगों को सुरक्षा गार्ड के रूप में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया था। श्री सिन्हा ने इस विचार को आगे बढ़ाया और पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की पहल की। शुरुआती दौर में उनका उद्देश्य बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा करना नहीं था। वह इसे समाज सेवा का एक माध्यम मानते थे। समाज सेवा से शुरू हुई पहल बनी बड़ी कंपनी श्री सिन्हा ने बाद में खुद बताया था कि एसआईएस की शुरुआत उन्होंने किसी व्यावसायिक योजना के तहत नहीं की थी। उनका मकसद सेना से सेवानिवृत्त लोगों को सम्मानजनक रोजगार दिलाना था लेकिन समय के साथ सुरक्षा सेवाओं की मांग बढ़ती गई और संगठन का दायरा भी फैलता गया। कंपनी ने कर्मचारियों के प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और कामकाज की मानकीकृत व्यवस्था पर जोर दिया। इन बदलावों ने एसआईएस को एक व्यवस्थित और बड़े कारोबारी संस्थान के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक सामाजिक पहल से शुरू हुआ यह सफर आखिरकार हजारों करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंच गया। पत्रकार, उद्यमी और सांसद के रूप में बनाई पहचान श्री सिन्हा ने जीवन में कई भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने पत्रकारिता से अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की, फिर सुरक्षा सेवा क्षेत्र में उद्यमी के रूप में पहचान बनाई और बाद में भाजपा की ओर से राज्यसभा सांसद भी बने। उनकी जीवन यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मामूली वेतन वाली नौकरी से शुरुआत करने के बावजूद उन्होंने अपने प्रयासों से एक बड़ी कंपनी स्थापित की। श्री सिन्हा के निधन के साथ बिहार से निकले उस उद्यमी का सफर थम गया, जिसने 250 रुपये की मासिक कमाई से शुरुआत कर करीब 16 हजार करोड़ रुपये के राजस्व वाली कंपनी खड़ी की।