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नई दिल्ली। विपक्षी इंडिया गठबंधन ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के जरिए लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और मताधिकार की रक्षा के लिए देशव्यापी राजनीतिक एवं कानूनी संघर्ष तेज करने का ऐलान किया। रामलीला मैदान से विपक्ष ने भरी हुंकार दिल्ली का रामलीला मैदान रविवार को इंडिया गठबंधन के बड़े राजनीतिक जमावड़े का केंद्र बना। गठबंधन के 23 दलों के प्रमुख नेताओं ने एक मंच से मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में बदलाव के जरिए वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। एक किलोमीटर की दूरी तय करने में लगे डेढ़ घंटे रैली के दौरान नेताओं के भाषणों के साथ सड़कों पर जुटी भीड़ भी चर्चा में रही। इंडिया गठबंधन ने पहले मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक पदयात्रा निकालने की योजना बनाई थी। लेकिन, आयोजकों के अनुसार, रास्ते में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुटने के कारण निर्धारित कार्यक्रम बदलना पड़ा। इसके बाद गठबंधन के 23 दलों के प्रमुख नेता खुले वाहनों में सवार होकर रैली स्थल की ओर बढ़े। मिंटो रोड से रामलीला मैदान की करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग डेढ़ घंटे लग गए। सड़क के दोनों ओर खड़े कार्यकर्ता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव सहित अन्य नेताओं की झलक पाने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टियों और अन्य सहयोगी दलों के झंडे पूरे रास्ते लहराते रहे। भीड़ के बीच सुरक्षा कर्मियों को नेताओं के वाहनों के आसपास व्यवस्था बनाए रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। खरगे के आवास से एक बस में निकले विपक्षी दिग्गज रामलीला मैदान पहुंचने से पहले विपक्षी गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास 10, राजाजी मार्ग पर एकत्र हुए। यहां से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, सुप्रिया सुले, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, रामगोपाल यादव, महबूबा मुफ्ती, अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल सहित कई नेता एक ही बस में रवाना हुए। बस में राहुल गांधी सबसे आगे बैठे थे। इसके बाद नेताओं का काफिला मिंटो रोड पहुंचा, जहां से खुली गाड़ियों में समर्थकों के बीच धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए सभी रामलीला मैदान पहुंचे। खरगे बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने तक जारी रहेगी लड़ाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों के मताधिकार को प्रभावित करने का आरोप लगाया और दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के बाद मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग पर एकजुट हैं और यह मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी जांच एजेंसियों के जरिए विपक्षी दलों को दबाव में लेने तथा उनके बीच मतभेद पैदा करने का भी आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी दल ऐसे दबाव से पीछे नहीं हटेंगे और संविधान तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। राहुल गांधी का आरोप- कई राज्यों में हुई 'वोट चोरी' लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के चुनावों में मतदाता सूचियों से जुड़ी गड़बड़ियां हुई हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद करीब साढ़े तीन करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने को विपक्ष की पहली प्राथमिकता बताया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा सजा की मांग की। श्री गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जांच एजेंसियों, न्यायपालिका और नौकरशाही जैसी संस्थाओं को अपने प्रभाव में ले लिया है। इसका नुकसान गरीबों, किसानों, मजदूरों और युवाओं को उठाना पड़ रहा है जबकि बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष संविधान की रक्षा के लिए भाईचारे और अहिंसक संघर्ष का रास्ता अपनाएगा। अखिलेश का दावा-यूपी में 1.27 करोड़ नाम कटे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची को लेकर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि प्रदेश में एक करोड़ 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इनमें समाजवादी पार्टी का समर्थन करने वाले मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। इस संबंध में चुनाव आयोग से शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। श्री यादव ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को अपने पक्ष में प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। साथ ही पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भी कथित धांधली का मुद्दा उठाया। उन्होंने रामलीला मैदान में जुटे लोगों का करते हुए इसे राजनीतिक बदलाव की मांग का संकेत बताया और इस मैदान की तुलना राजनीतिक संघर्ष की 'हल्दीघाटी' से की। ममता बनर्जी ने एसआईआर और ईवीएम पर उठाए सवाल तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के एसआईआर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और कहा कि उनकी पार्टी इस प्रक्रिया से प्रभावित हुई है लेकिन वह इसके खिलाफ आवाज उठाना जारी रखेगी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया और दावा किया कि चुनाव में उन्हें निष्पक्ष मुकाबले में पराजित नहीं किया गया बल्कि चुनावी प्रक्रिया के जरिए हराया गया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और सभी समुदायों के लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की। तेजस्वी ने शकुनि के पासों से की चुनाव प्रक्रिया की तुलना राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने महाभारत का उदाहरण देकर चुनावी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए और कहा कि महाभारत में शकुनि के पासे उसकी इच्छा के अनुसार परिणाम देते थे। इसी तरह चुनावी प्रक्रिया को भी सत्ता के पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को कमजोर किया जा रहा है। फारूक अब्दुल्ला ने पूछा-नाम कटने वाले हिंदू भी पाकिस्तानी हैं? नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को नागरिक अधिकारों से जोड़ा। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कुछ नेताओं पर मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाने का आरोप लगाया और कहा कि देश के मुसलमान इसी मिट्टी से जुड़े हैं और भारत के अभिन्न अंग हैं। यदि एसआईआर के दौरान करोड़ों हिंदुओं के नाम भी मतदाता सूची से हटाए गए हैं तो क्या उन्हें भी पाकिस्तानी कहा जाएगा? उन्होंने संविधान में सभी नागरिकों को मिले समान अधिकारों का उल्लेख करते हुए मताधिकार की सुरक्षा पर जोर दिया। महबूबा मुफ्ती ने राजनीतिक चंदे का मुद्दा उठाया पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रैली में राजनीतिक चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि जिन लोगों पर चंदे से जुड़ी गड़बड़ियों के आरोप हैं, उनकी नीयत और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।