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पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बिहार विधान परिषद के दो नवनिर्वाचित निर्दलीय सदस्यों वंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने को लेकर उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग उठाई है और चेतावनी दी कि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी विधान परिषद के कार्यकारी सभापति से लेकर अदालत और जनता के बीच अपनी लड़ाई जारी रखेगी। मनोज झा ने दिखाई तस्वीरें और वीडियो राजद के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने रविवार को यहां पार्टी के प्रदेश कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन कर दोनों विधान पार्षदों की सदस्यता पर सवाल उठाए। उन्होंने वंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज के भाजपा में शामिल होने से संबंधित तस्वीरें और वीडियो दिखाते हुए आरोप लगाया कि दोनों ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण की है। उन्होंने कहा कि ऐसा करना संविधान के दल-बदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन है इसलिए दोनों विधान पार्षदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। संविधान की दसवीं अनुसूची का दिया हवाला श्री झा ने अपनी मांग के समर्थन में भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रावधान के अनुसार, कोई व्यक्ति निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सदन का सदस्य निर्वाचित होने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो वह सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि श्री वंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज के मामले में भी यही प्रावधान लागू होता है। पार्टी इस कानूनी आधार पर दोनों सदस्यों की अयोग्यता की मांग करेगी। कार्यकारी सभापति से तत्काल फैसले की मांग राजद सांसद ने कहा कि पार्टी विधान परिषद के कार्यकारी सभापति डॉ. रामवचन राय के समक्ष यह मामला उठाएगा। पार्टी दोनों सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने के लिए औपचारिक कार्रवाई की मांग करेगी। उन्होंने कार्यकारी सभापति को 'पंच परमेश्वर' बताते हुए कहा कि इस पद पर बैठे व्यक्ति से निष्पक्ष और संविधान के अनुरूप निर्णय की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अयोग्यता के सवाल पर फैसला नहीं लिया गया तो राजनीतिक विवाद और बढ़ सकता है। 'यह वोट चोरी नहीं, जनादेश की डकैती है' श्री झा ने भाजपा पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि बिहार में भाजपा केवल वोट चोरी तक सीमित नहीं है बल्कि चुनाव में मिले जनादेश को भी अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे 'जनादेश की डकैती' करार दिया और कहा कि निर्दलीय उम्मीदवारों को मिला जनसमर्थन किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेने के लिए नहीं था। ऐसे में चुनाव के बाद भाजपा में शामिल होने के घटनाक्रम पर संवैधानिक सवाल उठते हैं। सम्राट चौधरी, मोदी और शाह पर भी साधा निशाना राजद सांसद ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए इस मामले में उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह घटनाक्रम संवैधानिक नियमों के पालन की कसौटी है और यदि ऐसी गतिविधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है तो राजद इसे जनता के सामने उठाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बिहार में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के साथ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जिन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं, वहां जदयू के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि दोनों विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के मामले को बिहार में भाजपा और जदयू के बीच राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग से अदालत तक जाने की तैयारी श्री झा ने स्पष्ट किया कि राजद इस विवाद को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी विधान परिषद के कार्यकारी सभापति के सामने दोनों सदस्यों की अयोग्यता का मुद्दा उठाने के साथ चुनाव आयोग के समक्ष भी अपनी बात रखेगी। हालांकि, चुनाव आयोग से बहुत अधिक उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकारी सभापति इस मामले में तत्काल और निष्पक्ष निर्णय नहीं लेते हैं तो पार्टी न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। संवैधानिक मंचों पर लड़ाई के साथ इस पूरे घटनाक्रम को जनता के सामने रखा जाएगा। तेजस्वी यादव ने भी सदस्यता समाप्त करने की मांग की उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले को उठाया है। उन्होंने श्री वंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज के निर्दलीय निर्वाचित होने के बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) का हवाला देते हुए दावा किया कि दोनों विधान पार्षद अयोग्यता के दायरे में आते हैं। उन्होंने मांग की कि दोनों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई में अनावश्यक देरी न की जाए और उनकी सदस्यता समाप्त की जाए।



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