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सीवान। ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाओं को अब सामान्य प्रसव के लिए दूर के बड़े अस्पतालों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा क्योंकि बिहार सरकार ने पंचायतों और गांवों के नजदीक स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (एपीएचसी) के लेबर रूम को आधुनिक उपकरणों से लैस करने की तैयारी शुरू कर दी है। लेबर रूम में बढ़ेंगी सुविधाएं, जिलों को निर्देश राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सामान्य प्रसव की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि उपकरण केवल अस्पताल में रखे न रहें बल्कि सही तरीके से काम भी करें। जिलों को आवश्यक उपकरणों की मांग बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) को भेजने का निर्देश दिया गया है। एलडीआर बेड से सीटीजी मशीन तक की व्यवस्था विभिन्न जिलों से मिली उपकरणों की कमी संबंधी रिपोर्ट की समीक्षा के बाद राज्य स्वास्थ्य समिति ने प्रत्येक एपीएचसी के प्रसव कक्ष के लिए 12 प्रकार के उपकरण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इनमें एक एलडीआर बेड, दो फीटल डॉप्लर, एक कार्डियोटोकोग्राफी (सीटीजी) मशीन, दो विद्युत चूषण यंत्र, दो परीक्षण बत्तियां, एक विद्युत ऑटोक्लेव मशीन, एक आपातकालीन उपचार ट्रॉली और दो डिजिटल शिशु तौल मशीनें शामिल हैं। फीटल डॉप्लर से गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कन की जांच की जा सकेगी। वहीं, सीटीजी मशीन प्रसव के दौरान गर्भस्थ शिशु की स्थिति पर नजर रखने में मदद करेगी। अन्य उपकरणों से जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी करने, नवजात की शुरुआती देखभाल और प्रसव में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को संक्रमणमुक्त रखने में सुविधा होगी। 12 तरह के उपकरण स्थानीय स्तर पर भी खरीदे जाएंगे प्रसव कक्षों के लिए कुछ उपकरण ऐसे भी हैं, जो फिलहाल बीएमएसआईसीएल के दर अनुबंध में शामिल नहीं हैं। ऐसे 12 प्रकार के उपकरणों की खरीद स्थानीय स्तर पर करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, इसके लिए पहले निगम से अनुपलब्धता प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। इन उपकरणों में रक्तचाप मापक यंत्र, तापमापी, शिशु चूषण यंत्र, नाड़ी ऑक्सीजन मापक यंत्र, बैटरी सहित इन्वर्टर, मेयो कैंची, स्पंज होल्डर, सामान्य प्रसव किट, एपीजियोटॉमी किट और प्रसव सहायक चिमटी किट शामिल हैं। इनके अलावा वयस्कों और बच्चों के लिए अलग-अलग अंबु बैग की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत के अनुसार विभिन्न आकार की ईटी और टीटी नलिकाएं भी खरीदी जा सकेंगी। रेडिएंट वार्मर समेत तीन उपकरणों की खरीद की तैयारी नवजात शिशुओं की देखभाल और अन्य चिकित्सकीय जरूरतों के लिए रेडिएंट वार्मर, लैरींगोस्कोप तथा ग्लूकोमीटर की खरीद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। इन उपकरणों के लिए बीएमएसआईसीएल स्तर पर दर अनुबंध तैयार किया जा रहा है। दर अनुबंध की सूचना जारी होने के बाद संबंधित स्वास्थ्य केंद्र ईएमएमएस पोर्टल के जरिए इनकी ऑनलाइन मांग भेज सकेंगे। उपकरणों की मांग से मंजूरी तक तय हुई प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग ने उपकरणों की जरूरत बताने से लेकर उनकी मंजूरी तक की जिम्मेदारी निर्धारित कर दी है। सबसे पहले अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी आवश्यक उपकरणों की सूची तैयार कर संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को भेजेंगे। इसके बाद पीएचसी या सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी मांग पत्र पर प्रतिहस्ताक्षर करेंगे। फिर इसे ईएमएमएस-ई-उपकरण पोर्टल पर अपलोड कर ऑनलाइन मांग दर्ज की जाएगी। जिला स्तर पर सिविल सर्जन सभी मांगों की जांच करेंगे। उपकरणों की वास्तविक जरूरत और उपलब्धता का आकलन करने के बाद ही उन्हें मंजूरी दी जाएगी। मरीजों की संख्या देखकर मिलेंगे उपकरण हर स्वास्थ्य केंद्र को एक जैसी मांग भेजने के बजाय उसकी वास्तविक जरूरतों का ध्यान रखना होगा। उपकरणों की मांग तैयार करते समय यह देखा जाएगा कि संबंधित केंद्र पर कितनी गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों के आने की संभावना है, वहां पहले से कौन-कौन से उपकरण मौजूद हैं और वर्तमान में कौन-सी स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हो रही हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य जरूरत के मुताबिक उपकरण उपलब्ध कराना और उनका बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। बड़े अस्पतालों में बेवजह रेफर करने की जरूरत होगी कम इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य प्रसव की सुविधा मजबूत होने की उम्मीद है। अभी कई गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए दूर स्थित बड़े स्वास्थ्य संस्थानों तक जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर सुविधाएं बेहतर होने से सामान्य प्रसव के मामलों में अनावश्यक रेफरल कम किया जा सकेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भारतीय जन स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। एपीएचसी के प्रसव कक्षों को आधुनिक बनाने की पहल इसी दिशा में की जा रही है। मशीनों के साथ प्रशिक्षित कर्मी भी जरूरी हालांकि, प्रसव कक्षों में उपकरण पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा। सुरक्षित प्रसव के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी भी जरूरी है। इसके साथ 24 घंटे स्वास्थ्य सेवा, मशीनों की नियमित देखभाल और जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिला को समय रहते बड़े अस्पताल में रेफर करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। इन सभी व्यवस्थाओं के प्रभावी ढंग से लागू होने पर गांवों और पंचायतों के आसपास रहने वाली महिलाओं को घर के नजदीक सुरक्षित सामान्य प्रसव की सुविधा मिल सकेगी।



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