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पटना। बिहार के बहुचर्चित अलकतरा घोटाला के एक मामले में आरोपित एक ट्रांसपोर्टर ने आज अपना अपराध कबूल कर लिया, जिसके बाद पटना की एक विशेष अदालत ने उसे एक माह सात दिन के सश्रम कारावास के साथ एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत संख्या दो के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने मामले में सुनवाई के दौरान ट्रांसपोर्टर शिव कुमार पारीख उर्फ शिव कुमार शर्मा की ओर से गुनाह कबूल करने के लिए दाखिल किए गए आवेदन पर सुनवाई और दोष स्वीकारोक्ति बयान दर्ज करने के बाद उसे भारतीय दंड विधान की अलग-अलग धाराओं में दोषी करार देते हुए एक माह सात दिन के सश्रम कारावास की सजा के साथ एक लाख रूपओं का जुर्माना भी किया। कारावास की सजा जेल में बिताई गई अवधि में समायोजित की गई जबकि दोषी ने एक लाख रुपए का जुर्माना अदालत में जमा कर दिया। इसके बाद उसका मुकदमा निष्पादित कर दिया गया। दूसरी ओर इसी मुकदमे के अन्य आरोपितों के खिलाफ मामले में अंतिम बहस जारी है। मामले के विशेष लोक अभियोजक राकेश दुबे ने बताया कि मामला वर्ष 1990 का था। आरोप के अनुसार, एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत दोषी, कोलकाता के विक्रम ट्रांसपोर्ट के मालिक ट्रांसपोर्टर शिव कुमार पारीख ने हल्दिया से 30.90 मीट्रिक टन अलकतरा का उठाव किया था, जिसे जयनगर पथ निर्माण प्रमंडल में पहुंचाना था लेकिन उक्त अलकतरा में से 19.84 मीट्रिक टन गायब कर दिया गया था जिसकी कीमत 87 हजार 99 रुपए थी। मामले की मूल प्राथमिकी जयनगर थाने में दर्ज की गई थी। बाद में सीबीआई ने इस मामले की जांच पटना उच्च न्यायालय के आदेश से अपने हाथ में ली थी और आरसी 37ए/1997 के रूप में अपनी प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के बाद सीबीआई ने इस मामले में ट्रांसपोर्टर समेत कई अन्य अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।



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