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काठमांडू/मोतिहारी। दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट के इलाके में मंगलवार सुबह लैंडिंग के दौरान दो हेलीकॉप्टरों की टक्कर में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई जबकि भारतीय मूल का न्यूजीलैंड का एक नागरिक और एक नेपाली पायलट घायल हो गए। करीब 4,371 मीटर की ऊंचाई पर हुई इस दुर्घटना ने एवरेस्ट क्षेत्र में बढ़ती हेलीकॉप्टर उड़ानों की सुरक्षा और उनके नियमन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, हादसा सुबह करीब 8:12 बजे नेपाल के सोलुखुम्बु जिले के फेरिचे स्थित हेलीपैड पर हुआ। मृतक की पहचान फिशटेल एयर के हेलीकॉप्टर में सवार भारतीय नागरिक वसंत कुमार बलरामुडू के रूप में हुई है। दुर्घटना में भारतीय मूल के न्यूजीलैंड निवासी शैलेश कृष्ण पटेल और फिशटेल एयर के पायलट रवींद्र प्रधान घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए काठमांडू स्थित नेपाल मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्राधिकरण के मुताबिक, दुर्घटना में शामिल एक हेलीकॉप्टर एएस-350 (पंजीकरण संख्या 9एन-एओडी) एयर डायनेस्टी हेली सर्विस का था, जो लुक्ला हवाई अड्डे से सोलुखुम्बु के एक हेलीपैड के लिए मालवाहक उड़ान पर था। दूसरा हेलीकॉप्टर एएस-350 (पंजीकरण संख्या 9एन-एजेआर) फिशटेल एयर का था, जो गोरक्षेप से दो विदेशी यात्रियों को लेकर आया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों हेलीकॉप्टर विपरीत दिशाओं से हेलीपैड पर उतरने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान उनके बीच टक्कर हो गई। बताया गया है कि दोनों हेलीकॉप्टर उस समय जमीन से करीब दो से तीन मीटर ऊपर थे। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के महानिदेशक मुकेश डांगोल ने प्रारंभिक जांच के हवाले से बताया कि हादसे के पीछे पायलटों के बीच संवाद में गड़बड़ी की आशंका है। उनके अनुसार, दुर्घटनास्थल लुक्ला हवाई अड्डे के हवाई यातायात नियंत्रण टावर के संचार क्षेत्र से बाहर है। ऐसे इलाकों में हेलीकॉप्टर पायलटों को आपस में समन्वय बनाकर उड़ान और लैंडिंग करनी पड़ती है। प्राधिकरण घायल पायलट का बयान दर्ज कर रहा है। इस बीच, सोशल मीडिया पर दुर्घटना से जुड़ा एक वीडियो भी प्रसारित हो रहा है। इसमें कथित तौर पर हेलीपैड पर मौजूद कर्मचारियों की चेतावनी के बावजूद एक हेलीकॉप्टर को तेजी से उतरते देखा जा सकता है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और दुर्घटना से जुड़े घटनाक्रम की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हेलीकॉप्टर उड़ानों को लेकर लंबे समय से विवाद एवरेस्ट क्षेत्र में यह दुर्घटना ऐसे समय हुई है, जब वहां हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार और उनकी बढ़ती आवाजाही को लेकर स्थानीय समुदायों तथा पर्यटन उद्योग के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हेलीकॉप्टरों की लगातार उड़ानों से सागरमाथा राष्ट्रीय उद्यान के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीवों और क्षेत्र की प्राकृतिक शांति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टरों का शोर स्कूलों और कार्यालयों तक को प्रभावित करता है। इसी विवाद के बीच स्थानीय निकायों और सागरमाथा राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन ने 12 दिसंबर 2025 को पार्क क्षेत्र में पर्यटन और भ्रमण के लिए हेलीकॉप्टर उड़ानों पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे। ये प्रतिबंध एक जनवरी 2026 से लागू किए जाने थे, जबकि बचाव अभियानों को इससे छूट दी गई थी। स्थानीय युवा समूहों ने भी हेलीकॉप्टरों की आवाजाही के विरोध में अभियान चलाया था। दूसरी ओर, पर्यटन उद्योग का कहना है कि एवरेस्ट दर्शन के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं नेपाल के उच्चस्तरीय पर्यटन कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे पर्यटन की मांग उन यात्रियों के बीच अधिक है, जो लंबी पैदल यात्रा किए बिना दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी का नजारा देखना चाहते हैं। स्थानीय लोगों की एक प्रमुख शिकायत यह भी है कि हेलीकॉप्टर संचालक वापसी के दौरान ट्रेकिंग कर रहे पर्यटकों को भी ले जाते हैं, जिससे स्थानीय गाइड, पोर्टर और अन्य कामगारों के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं। एवरेस्ट आधार शिविर तक की पैदल यात्रा में आमतौर पर करीब 14 दिन लगते हैं। पहले भी हो चुके हैं जानलेवा हादसे नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं का इतिहास भी चिंताजनक रहा है। जुलाई 2023 में सोलुखुम्बु जिले के लामाजुरा इलाके में मनांग एयर का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में पांच मैक्सिकन पर्यटकों और नेपाली पायलट सहित सभी छह लोगों की मौत हो गई थी। हेलीकॉप्टर एवरेस्ट क्षेत्र की भ्रमण उड़ान के बाद काठमांडू लौट रहा था। नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 1966 से दुर्घटनाओं का लेखा-जोखा रखे जाने के बाद से देश में कम से कम 22 घातक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ताजा हादसा पर्वतीय पर्यटन के बढ़ते दबाव के बीच उड़ान सुरक्षा, हवाई यातायात समन्वय और हेलीकॉप्टर सेवाओं के नियमन की चुनौती को फिर सामने लाता है।



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