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मोतिहारी। तीन माह की गुमनामी, परिवार की बेचैनी और दर्दनाक इंतजार के बाद बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया की 20 वर्षीय युवती घर लौट आई है। पश्चिम बंगाल के पोंजीपोरा स्थित रेड लाइट क्षेत्र से उसकी बरामदगी ने युवतियों को बहलाकर दूसरे राज्यों में ले जाने और कथित मानव तस्करी के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित रोहित कुमार को गिरफ्तार किया है। अब जांच का केंद्र यह है कि युवती को वहां तक पहुंचाने में और कौन-कौन शामिल था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि युवती करीब तीन माह से लापता थी। परिजन उसकी तलाश कर रहे थे लेकिन सामाजिक लोक-लाज के कारण कानूनी कार्रवाई में देरी हुई। इसी बीच युवती ने एक दिन फोन कर परिजनों को अपनी आपबीती सुनाई। उसने आरोप लगाया कि रोहित कुमार उसे बहलाकर पश्चिम बंगाल ले गया और वहां बेच दिया। युवती की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने 08 अक्टूबर को केसरिया थाने में प्राथमिकी संख्या 366/2026 दर्ज कराई। पुलिस ने उसी दिन फोन कॉल के आधार पर उसकी तलाश शुरू की। 09 अक्टूबर को केसरिया पुलिस की टीम ने पश्चिम बंगाल के पोंजीपोरा स्थित रेड लाइट क्षेत्र से युवती को बरामद कर लिया। पूर्वी चंपारण लौटने के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की तलाश युवती की बरामदगी के बाद भी पुलिस ने आरोपित की तलाश जारी रखी। गुरुवार को रोहित कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। केसरिया थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि आरोपी मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज थाना क्षेत्र के साहेब पट्टी गांव का निवासी है। युवती की घर वापसी से परिवार को राहत जरूर मिली है लेकिन मामले की पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि युवती को पश्चिम बंगाल ले जाने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या इसके पीछे मानव तस्करी का संगठित गिरोह सक्रिय है। अन्य संभावित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।



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