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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है और अब सरकार का लक्ष्य सौर ऊर्जा को घरों, खेतों, उद्योगों तथा परिवहन का प्रमुख आधार बनाकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाना है। पांच साल पहले हासिल किया स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य श्री मोदी ने सोमवार को भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट को संबोधित करते हुए बताया कि भारत ने अपनी कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का आधा हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच साल पहले, वर्ष 2025 में ही पूरा कर लिया। देश में गैर-जीवाश्म ऊर्जा की स्थापित क्षमता लगभग 300 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है। भारत 2030 तक 500 गीगावॉट क्षमता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगले 10 से 11 वर्षों में 500 गीगावॉट अतिरिक्त गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़ने का भी प्रयास किया जाएगा। 65 लाख घरों तक पहुंची सूर्यघर योजना प्रधानमंत्री ने कहा कि फरवरी 2024 में शुरू हुई पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से अब तक 65 लाख से अधिक घर जुड़ चुके हैं। योजना का लक्ष्य एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना है। हर छह दिन में करीब एक लाख नए घर इस अभियान से जुड़ रहे हैं। एक अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि योजना से जुड़े घरों के बिजली बिल में लगभग 76 प्रतिशत तक कमी आई है। उन्होंने कहा कि कई परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है, जबकि कुछ परिवार अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। किसानों को सौर ऊर्जा से सालाना एक लाख तक बचत श्री मोदी ने बताया कि पीएम कुसुम योजना से 30 लाख से अधिक किसानों के लिए सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की व्यवस्था हुई है। सोलर पंप इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक किसान को सालाना लगभग एक लाख रुपये की बचत हो सकती है। उन्होंने किसानों से खाली जमीन और खेतों की मेड़ों पर भी सोलर पैनल लगाने का आह्वान किया और कहा कि अब लक्ष्य केवल अन्न उत्पादन नहीं बल्कि किसानों को ऊर्जा उत्पादक बनाना भी है। उन्होंने तालाबों और झीलों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाने वाली पीएम सूर्य सरोवर योजना का भी उल्लेख किया। सौर उपकरणों के निर्माण में भारत की तेज रफ्तार प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले भारत की सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता करीब दो गीगावॉट थी जो अब 200 गीगावॉट से अधिक हो गई है। सोलर सेल निर्माण क्षमता भी लगभग 40 गीगावॉट तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि देश की 44 हजार से अधिक सरकारी इमारतें सौर ऊर्जा से जुड़ चुकी हैं, जिससे हर साल लगभग 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। हरित ऊर्जा में 20 लाख करोड़ के निवेश अवसर श्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आया है। वर्ष 2024 के री-इन्वेस्ट सम्मेलन के बाद से करीब दो वर्षों में ही छह लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। उन्होंने अनुमान जताया कि इस दशक के अंत तक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश अवसर पैदा हो सकते हैं। देश में हरित ऊर्जा गलियारों को मजबूत करने के लिए लगभग दो लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य भी रखा गया है। ग्रीन हाइड्रोजन और सौर बिजली से चलेंगे वाहन प्रधानमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इस दशक के अंत तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है। देश में पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन शुरू की जा चुकी है। उन्होंने स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और उद्यमियों से ऐसे उपकरण विकसित करने की अपील की, जिनसे घरों में खाना बनाने, इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करने, डेयरी और कृषि कार्यों में सौर ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल हो सके। उन्होंने ऊर्जा भंडारण और स्वदेशी बैटरी तकनीक विकसित करने पर भी जोर दिया। अफ्रीका के लिए 20 करोड़ डॉलर की सौर सुविधा का प्रस्ताव श्री मोदी ने कहा कि भारत अपनी स्वच्छ ऊर्जा तकनीक और अनुभव दूसरे देशों के साथ भी साझा करना चाहता है। इसी दिशा में अफ्रीकी देशों के लिए 20 करोड़ डॉलर की अफ्रीका सोलर फैसिलिटी का प्रस्ताव रखा गया है। समिट में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं असेंबली और ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथा सम्मेलन भी आयोजित हो रहा है। स्वच्छ ऊर्जा केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और रोजगार बढ़ाने का बड़ा अवसर भी है।



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