Full Story

भागलपुर। बिहार में सीमांचल और अंग प्रदेश की ‘जीवनरेखा’ कहे जाने वाले भागलपुर के विक्रमशिला गंगा पुल पर 30 सितंबर की आधी रात से सभी तरह के आवागमन बंद हो जाएंगे। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और स्थायी स्लैब निर्माण के कारण यह व्यवस्था अगले करीब तीन महीने तक रहने की बात कही गई है। इसे देखते हुए भागलपुर जिला प्रशासन ने यात्रियों के लिए बियाडा घाट से फेरी सेवा और वाहनों के लिए सबौर के बाबूपुर घाट से कार्गो सेवा की व्यवस्था की है। सड़क मार्ग से पटना और उत्तर बिहार जाने वालों के लिए मुंगेर गंगा पुल के रास्ते वैकल्पिक यातायात की व्यवस्था भी की गई है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की अस्सी सदस्यीय टीम पहुंचकर बेली ब्रिज को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यात्री बियाडा घाट से पार करेंगे गंगा विक्रमशिला पुल बंद होने के बाद गंगा पार करने वाले यात्रियों के लिए जलमार्ग महत्वपूर्ण विकल्प होगा। जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय के मुताबिक, पर्याप्त क्षमता वाले और सुरक्षित साधनों से ज्यादा से ज्यादा यात्रियों का आवागमन सुनिश्चित करने की तैयारी की गई है। यात्रियों के लिए बरारी घाट के बगल में स्थित बियाडा घाट से फेरी सेवा संचालित होगी। यहां से यात्री जलमार्ग के जरिए नवगछिया की ओर आ-जा सकेंगे। बरारी घाट से नहीं चलेगी फेरी पूर्व में संचालित बरारी घाट से फिलहाल फेरी सेवा की अनुमति नहीं दी गई है। प्रशासन के मुताबिक, पुल निर्माण एजेंसी को यहां स्थायी सुधार का काम करना है। इस दौरान बड़ी मशीनरी, क्रेन और अन्य निर्माण उपकरण मौजूद रहेंगे। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने बरारी घाट के बजाय बियाडा घाट को फेरी सेवा के लिए चुना है। यात्री और वाहनों के लिए एक ही घाट पर भीड़ न हो, इसलिए प्रशासन ने दोनों की व्यवस्था अलग-अलग स्थानों पर की है। सबौर के बाबूपुर घाट से कार्गो जहाजों का परिचालन होगा, जिनके माध्यम से छोटे-बड़े वाहनों को गंगा पार कराया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यात्री फेरी और कार्गो को अलग-अलग घाट से चलाने से भीड़ कम होगी और जलमार्ग पर संचालन को व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी। पटना-उत्तर बिहार जाना है तो मुंगेर का रास्ता पुल बंद होने का असर भागलपुर और बांका के साथ झारखंड के साहेबगंज और गोड्डा समेत आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों पर भी पड़ेगा। इन इलाकों से पटना और उत्तर बिहार की ओर जाने वाले वाहनों को मिर्जाचौकी-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन (एनएच-33) से मुंगेर गंगा पुल पार कर आगे जाना होगा। इसके लिए राज्य सरकार के निर्देश पर भागलपुर से मुंगेर तक इस सड़क मार्ग की एक लेन चालू की गई है। तीन महीने क्यों बंद रहेगा पुल विक्रमशिला गंगा पुल पर आवागमन अगले करीब तीन महीने तक बंद रहने की बात कही गई है। इस दौरान पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर मौजूद बेली ब्रिज को हटाकर स्थायी स्लैब का निर्माण किया जाएगा। संबंधित निर्माण एजेंसी ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। पुल बंद होने के दौरान यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए घाटों तथा संबंधित स्थानों पर कई व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इनमें मेडिकल कैंप, जीविका दीदी की रसोई, कंट्रोल रूम, प्रशासनिक प्रतिनिधि, आपदा मित्र और पुलिस बल की तैनाती शामिल है। वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव के निर्देशन में घाटों और वैकल्पिक यातायात मार्गों पर पुलिस अधिकारियों और जवानों की तैनाती की जाएगी। पुलिस भीड़ नियंत्रण और यात्रियों के सुरक्षित आवागमन की निगरानी करेगी। परेशानी हो तो कंट्रोल रूम से करें संपर्क यात्रियों की सहायता और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिला इमरजेंसी कंट्रोल रूम सक्रिय रहेगा। प्रशासन की ओर से जिला आपदा नियंत्रण कक्ष का नंबर 0641-2402871 जारी किया गया है। यात्रा के दौरान परेशानी होने, रास्ते या व्यवस्था से संबंधित जानकारी लेने अथवा सुझाव देने के लिए यात्री इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। दूसरी ओर, पर्व-त्योहारों के करीब पुल बंद किए जाने को लेकर भागलपुर और नवगछिया के व्यवसायियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मरम्मत और रखरखाव के लिए पुल को नवंबर के बाद बंद किया जाना चाहिए था। व्यवसायियों का तर्क है कि पुल बंद होने से नवगछिया अनुमंडल का सड़क संपर्क प्रभावित होगा, जिसका असर कारोबार के साथ आम लोगों के आवागमन पर भी पड़ेगा। सांसद राजेश वर्मा ने भी उठाया समय पर सवाल खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा ने भी व्यवसायियों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि पुल बंद करने का मौजूदा समय उचित नहीं है। उनके मुताबिक, त्योहार समाप्त होने के बाद मरम्मत और रखरखाव का काम कराया जाना चाहिए था। बाढ़ के बाद अब तीन महीने आवागमन की चुनौती भागलपुर और खासकर नवगछिया क्षेत्र के लोग करीब डेढ़ महीने से बाढ़ की परेशानी झेल रहे हैं। अब विक्रमशिला पुल के करीब तीन महीने तक बंद रहने से आवागमन एक बड़ी चुनौती बन सकता है। जिला प्रशासन ने जहाज, नाव, कार्गो और वैकल्पिक सड़क मार्गों के जरिए यातायात बनाए रखने की व्यवस्था की है। पुल बंद होने के बाद इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर ही भागलपुर और गंगा पार के क्षेत्रों के बीच यात्रियों और वाहनों के सुचारु आवागमन की बड़ी जिम्मेदारी होगी।