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नई दिल्ली। मोबाइल नेटवर्क और दूरसंचार सेवाओं में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने शुक्रवार को इस संबंध में नए दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया है। इसका मकसद दूरसंचार क्षेत्र में एआई की बढ़ती भूमिका के बीच तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के साथ उससे जुड़े संभावित खतरों को कम करना है। ट्राई ने प्रस्तावित दिशानिर्देशों पर दूरसंचार कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों से 27 नवंबर 2026 तक लिखित सुझाव मांगे हैं। मोबाइल नेटवर्क में बढ़ती एआई की भूमिका, अब जवाबदेही पर जोर देश में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं के संचालन में एआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। दूरसंचार नेटवर्क के प्रबंधन से लेकर ग्राहकों को सेवाएं उपलब्ध कराने तक इस तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में ट्राई का मानना है कि नई तकनीक का इस्तेमाल केवल सुविधाएं बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ सुरक्षा, निष्पक्षता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से नियामक ने दूरसंचार नेटवर्क और दूरसंचार सेवाओं में एआई के जिम्मेदार इस्तेमाल से संबंधित दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार किया है। सात सिद्धांतों पर तैयार होगी एआई की व्यवस्था ट्राई की यह पहल केंद्र सरकार की ओर से फरवरी 2026 में जारी ‘इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइंस’ पर आधारित है। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य एआई की क्षमताओं का इस्तेमाल देश के समावेशी विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में करना है। साथ ही इस तकनीक से व्यक्तियों और समाज के सामने पैदा होने वाले संभावित जोखिमों का समाधान भी तलाशना है। केंद्र सरकार ने इसके लिए सात प्रमुख सिद्धांत तय किए हैं। इनमें भरोसे को आधार बनाना, लोगों के हितों को प्राथमिकता देना, अनावश्यक प्रतिबंधों के बजाय नवाचार को बढ़ावा देना, निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करना, जवाबदेही तय करना, तकनीक को समझने योग्य बनाना तथा सुरक्षा, मजबूती और टिकाऊपन पर ध्यान देना शामिल है। सरकार के इन दिशानिर्देशों के चौथे भाग में उद्योग जगत और नियामक संस्थाओं के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन भी दिया गया है ताकि एआई के इस्तेमाल से जुड़ी व्यवस्था अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बन सके। सिर्फ मोबाइल और इंटरनेट नहीं, देश की सुरक्षा से भी जुड़ा मामला दूरसंचार क्षेत्र देश के डिजिटल ढांचे की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल है। आज मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क के सहारे केवल बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान ही नहीं होता बल्कि सरकारी और जरूरी डिजिटल सेवाएं भी लोगों तक पहुंचती हैं। व्यापार, वाणिज्य और देश की महत्वपूर्ण सूचना प्रणालियों का संचालन भी काफी हद तक दूरसंचार सेवाओं पर निर्भर करता है। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में भी सुरक्षित और मजबूत संचार नेटवर्क की अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि ट्राई दूरसंचार क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल को लेकर ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहता है, जिसमें तकनीकी सुविधाओं के साथ सुरक्षा और जवाबदेही को भी पर्याप्त महत्व मिले। एआई का इस्तेमाल कैसे हो, जिम्मेदारी किसकी होगी ट्राई के मुताबिक, दूरसंचार नेटवर्क और सेवाओं में एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच स्पष्ट दिशा-निर्देशों की जरूरत महसूस की जा रही है। नियामक चाहता है कि दूरसंचार क्षेत्र में एआई से जुड़े फैसलों और व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्टता बनी रहे। इसके साथ कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सके। प्रस्तावित दिशा-निर्देशों का उद्देश्य केंद्र सरकार की एआई संचालन नीति को दूरसंचार क्षेत्र में एक समान और जिम्मेदार तरीके से लागू करने में मदद करना है। इससे कंपनियों और नियामक संस्थाओं को तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े सिद्धांतों और जिम्मेदारियों को समझने में आसानी होगी। 27 नवंबर तक सुझाव देने का मौका ट्राई ने प्रस्तावित दिशा-निर्देशों का मसौदा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है। दूरसंचार कंपनियां, उद्योग से जुड़े संगठन और अन्य संबंधित पक्ष इस मसौदे पर 27 नवंबर 2026 तक अपनी लिखित टिप्पणियां और सुझाव भेज सकते हैं।



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