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भागलपुर। बिहार में भागलपुर जिले के चर्चित सृजन घोटाला के बाद शिक्षा विभाग का एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां एक फर्जी शिक्षिका के नाम पर एक करोड़ 70 लाख रुपये की फर्जी निकासी कर ली गई है। जांच में फर्जी शिक्षिका के साथ-साथ आवंटित विद्यालय भी गलत निकला। इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी, डीपीओ (स्थापना) सहित छह लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। फर्जी आईडी बनाकर खुलवाया बैंक खाता भागलपुर के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष चन्द्र गुप्ता ने शुक्रवार को यहां बताया कि शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्थापना) के कार्यालय के संविदा डाटा ऑपरेटर अविनाश राज ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर तनुश्री नाम की एक फर्जी शिक्षिका के नाम से एक आईडी बनाकर बैंक खाता खुलवाया और समय-समय पर इसमें तीन चरण में कुल एक करोड़ 70 लाख रुपये की राशि जमा कराई थी। पहली बार 52 लाख की निकासी उक्त डाटा ऑपरेटर द्वारा फर्जी शिक्षिका के बैंक खाते से पहली बार करीब 52 लाख रुपए की निकासी कर ली गई। इसके बाद दूसरी बार 46 लाख और तीसरी बार 73 लाख रुपये की निकासी का पूरा प्रयास किया गया लेकिन बैंक की ओर से रोक लग जाने से डाटा ऑपरेटर के मंसूबे पर पानी फिर गया और उसे पूरी राशि (पैसे) नहीं मिल सकी। बैंक की रोक से खुला मामला संबंधित बैंक की रोक और शिक्षा विभाग, पटना की प्रारंभिक जांच से इस मामले का भंडाफोड़ हुआ और इसमें डाटा ऑपरेटर अविनाश कुमार , उसकी पत्नी काजल कुमारी और एक हेड क्लर्क शिशिर झा की संलिप्तता सामने आई है। वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्थापना) शशि चंदन चौधरी पर उन घोटालाबाजों को सहयोग करने का आरोप है। छह के खिलाफ नामजद प्राथमिकी इधर शिक्षा उप निदेशक ने बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके द्वारा डाटा ऑपरेटर अविनाश राज, उसकी पत्नी काजल कुमारी, हेड क्लर्क शिशिर झा, राशि पाने वाली तनुजा देवी, जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार और जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्थापना) शशि चंदन चौधरी के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के निर्देश पर चार सदस्यीय एक जांच समिति बनाई गई है। वहीं, संविदा पर कार्यरत डाटा ऑपरेटर अविनाश राज को काम से हटा दिया गया है और हेड क्लर्क को निलंबित कर दिया गया है।इससे संबंधित पूरी रिपोर्ट विभागीय मुख्यालय को भेज दी गई है। सृजन घोटाले के बीच नया मामला गौरतलब है कि बिहार में करोड़ों रुपये की सरकारी राशि के सबसे बड़े सृजन घोटाले की सीबीआई जांच और कार्रवाई के दरम्यान अब भागलपुर में शिक्षा विभाग का यह घोटाला सामने आया है, जो बिहार में संभवतः पहला शिक्षा घोटाला है। ऐसे में शिक्षा विभाग को इस मामले में शामिल सभी लोगों खासकर जांच के दायरे में आए दोनों अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की जरुरत है ताकि सरकारी खजाने को लूटने वाले अधिकारी दंडित हो और इसकी पुनरावृत्ति अन्य जिलों में नहीं हो सके। दो हिरासत में, पूछताछ शुरू फिलहाल इस मामले में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है। वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की विशेष टीम गठित करने के बाद उक्त टीम ने आज डाटा ऑपरेटर अविनाश राज और जिला कार्यक्रम अधिकारी स्थापना शशि चंदन चौधरी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरु कर दी है।



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