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मोतिहारी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी ने शनिवार को अपना 10वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया, जहां शिक्षा, शोध, नवाचार और गांधीवादी मूल्यों के साथ विश्वविद्यालय की एक दशक की विकास यात्रा का उल्लेख किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ, एनएएसी की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव, पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी और सांसद राधा मोहन सिंह समेत कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परिषद के अध्यक्ष प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। युवा ही देश का असली हीरा : सतीश चंद्र दुबे मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने विश्वविद्यालय को स्थापना के दस वर्ष पूरे करने पर बधाई देते हुए कहा कि चंपारण की ऐतिहासिक धरती पर स्थापित इस विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने विद्यार्थियों से पुस्तकीय ज्ञान के साथ महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और अंत्योदय के सिद्धांतों को भी जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "कोयला काला हीरा है, पर युवा ही देश का असली हीरा है।" उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय अनुसंधान के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के साथ आसपास के क्षेत्रों के विकास और बिहार की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। संस्कार के बिना ज्ञान और शिक्षा अधूरे : मजहर आसिफ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ ने भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और संस्कारों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ज्ञान, शिक्षा और संस्कृति के स्वरूप अलग-अलग हैं, लेकिन संस्कार के बिना न ज्ञान संभव है और न शिक्षा। उन्होंने कहा कि दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना, जैसा हम अपने लिए चाहते हैं, भारतीय संस्कारों का मूल भाव है। उन्होंने विद्यार्थियों को परिश्रम का महत्व समझाते हुए कहा, "जो पानी से नहाता है, वह कपड़े बदलता है; जो पसीने से नहाता है, वह इतिहास बदलता है।" उन्होंने महिलाओं के सम्मान को जीवन का अनिवार्य मूल्य बताते हुए विद्यार्थियों से प्रत्येक स्त्री के सम्मान का आह्वान किया। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और परिणाम पर जोर: नागेश्वर राव राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि उच्च शिक्षा में केवल संस्थानों तक पहुंच बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भविष्य में उच्च शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन इनपुट के बजाय आउटपुट आधारित मानकों पर किया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की दिशा में विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। चंपारण की धरती ने देश को दी नई चेतना : मालिनी अवस्थी पद्मश्री सम्मानित लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि चंपारण की धरती से सत्याग्रह के रूप में ऐसी चेतना का उदय हुआ, जिसने देश को नई दिशा दी। उन्होंने मौजूदा दौर में तकनीक पर बढ़ती निर्भरता और भविष्य को लेकर मानवीय चिंताओं का उल्लेख करते हुए परिवार, समाज, राजनीति और सत्ता, सभी स्तरों पर अनुशासन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कामना की कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी ज्ञान और संस्कार के माध्यम से पूरी दुनिया में प्रकाश फैलाएं। दस वर्षों की यात्रा आत्ममंथन और नए संकल्प का अवसर: राधा मोहन पूर्वी चंपारण के सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का दसवां स्थापना दिवस उपलब्धियों पर गौरव करने के साथ आत्ममंथन और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की उपलब्धियां गौरव के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आती हैं। युवाओं के सामने उपलब्ध अवसरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने नवाचार, अनुशासन, समस्या के समाधान की क्षमता, नशामुक्ति और आत्मनिर्भरता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि विश्वविद्यालय के सभी स्थापना दिवस समारोहों में शामिल होने का अवसर मिला है। 14 विभागों से 20 तक पहुंचा विश्वविद्यालय अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि स्थापना दिवस पीछे मुड़कर उपलब्धियों की समीक्षा करने और आगे की राह तय करने का दिन है। उन्होंने विश्वविद्यालय की एक दशक की विकास यात्रा का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 14 विभागों से शुरू हुआ संस्थान अब 20 विभागों तक पहुंच चुका है। स्नातक पाठ्यक्रमों के साथ स्नातकोत्तर और पीएचडी की पढ़ाई संचालित हो रही है। एक परिसर से शुरू हुई यात्रा अब तीन अन्य परिसरों तक विस्तृत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय के 500 से अधिक विद्यार्थियों ने यूजीसी-नेट और करीब 300 विद्यार्थियों ने गेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। गेट-2026 में बीटेक कंप्यूटर साइंस के 51 विद्यार्थियों में से 33 ने सफलता हासिल की। इनमें एक विद्यार्थी ने अखिल भारतीय स्तर पर 63वीं रैंक प्राप्त की। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को पूर्ण रूप से लागू करने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र की स्थापना की है। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स डार्टमाउथ समेत 13 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शैक्षणिक समझौते किए गए हैं। आईआईआरएफ-2024 की रैंकिंग में विश्वविद्यालय देश के शीर्ष 20 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल रहा है। इसके अलावा नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में विश्वविद्यालय ने तीन पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। 261 एकड़ भूमि पर बनेगा स्थायी परिसर स्थायी परिसर के निर्माण को विश्वविद्यालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि मार्च 2024 में 127.26 एकड़ अतिरिक्त भूमि मिलने के बाद विश्वविद्यालय के पास कुल 261.26 एकड़ जमीन उपलब्ध है। स्थायी परिसर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शिक्षा मंत्रालय को प्रस्तुत की जा चुकी है। निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के साथ समझौता भी किया गया है। उन्होंने विश्वविद्यालय के तीन दीक्षांत समारोहों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन आयोजनों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गांधीवादी मूल्यों को आधार बनाकर अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है। आने वाले वर्षों में स्थायी परिसर का निर्माण, शोध की गुणवत्ता में वृद्धि और चंपारण की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना उसकी प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। समारोह के अंत में विशेष कार्य पदाधिकारी प्रो. अतुल कुमार शरण ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



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