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सीवान। बिहार में सीवान जिले के आलमपुर में हुए भीषण विस्फोट के बाद बरामद पटाखों और विस्फोटक पदार्थों को नष्ट करने के दौरान शनिवार देर शाम बड़हरिया प्रखंड के भलुआरा तकिया गांव में जोरदार धमाका होने से दहशत फैल गई, जिसके बाद घरों से बाहर निकले आक्रोशित ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पुलिस-प्रशासन का घेराव कर विरोध जताया। अचानक गूंजा धमाका, घरों से बाहर भागे लोग भलुआरा तकिया गांव में शनिवार देर शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक तेज विस्फोट की आवाज सुनाई दी। ग्रामीणों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि आसपास का इलाका कांप उठा। घरों में सो रहे या आराम कर रहे लोग घबराकर बाहर निकल आए। कुछ ही देर में इलाके में धुएं का गुबार दिखाई देने लगा। अचानक हुए धमाके और धुएं से लोगों की घबराहट और बढ़ गई। बाद में पता चला कि आलमपुर विस्फोट की घटना के बाद बरामद पटाखों और विस्फोटक पदार्थों को नष्ट करने की कार्रवाई के दौरान यह धमाका हुआ था। घरों के करकट उड़े, खिड़कियों के जंगले टूटने का दावा धमाके के बाद ग्रामीणों ने आसपास के मकानों को नुकसान पहुंचने की शिकायत की। उनका दावा है कि विस्फोट के प्रभाव से कुछ घरों के करकट उड़ गए और खिड़कियों के जंगले टूट गए। ग्रामीणों के मुताबिक, तेज आवाज के कारण बीमार लोगों को भी परेशानी हुई। हालांकि, घरों को हुए कथित नुकसान और उसके वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नुकसान कितना हुआ और कितने मकान प्रभावित हुए, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। गुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासन को घेरा विस्फोट के बाद गांव में नाराजगी फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और पुलिस-प्रशासन का घेराव कर विरोध जताया। ग्रामीणों का सवाल था कि आबादी के आसपास विस्फोटक पदार्थों को नष्ट करने से पहले सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए। उनका कहना था कि यदि धमाके का असर आसपास के घरों तक पहुंचने की आशंका थी, तो लोगों को संभावित खतरे से बचाने के लिए आवश्यक सावधानी बरती जानी चाहिए थी। ग्रामीणों ने विस्फोटक सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। पुलिस से नोकझोंक, दमकल वाहन को नुकसान की सूचना विरोध के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच नोकझोंक होने की भी सूचना है।इसके अलावा दमकल की गाड़ी में तोड़फोड़ की कोशिश और वाहन को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस से नोकझोंक, तोड़फोड़ की कोशिश और दमकल वाहन को क्षति पहुंचने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन घटनाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है। आलमपुर हादसे के बाद दूसरी घटना से बढ़ी चिंता आलमपुर में हुए भीषण विस्फोट के बाद बरामद विस्फोटक सामग्री का सुरक्षित निस्तारण प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है लेकिन भलुआरा तकिया में हुए धमाके ने इस प्रक्रिया के दौरान आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों की नाराजगी का मुख्य कारण यही है कि विस्फोटक पदार्थों को नष्ट करने जैसी संवेदनशील कार्रवाई के समय आबादी को संभावित खतरे से बचाने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे।



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