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मुंबई। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें और बढ़ाए जाने की आशंका के बीच अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब दो दशक के ऊंचे स्तर के पास पहुंचने के दबाव में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की हुई भारी बिकवाली से बीते सप्ताह करीब तीन प्रतिशत से लुढ़के घरेलू शेयर बाजार की नजर अगले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के निर्णयों और कंपनियों के चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के जारी होने वाले नतीजों पर रहेगी। सेंसेक्स 1986 अंक टूटा, निफ्टी 718 अंक फिसला बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1986.04 अंक यानी 2.68 फीसदी गिरकर सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन 71,909.70 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का निफ्टी 718.55 अंक यानी 3.1 फीसदी का गोता लगाकर 22,421.95 अंक पर बंद हुआ। दो अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण शेयर बाजार में अवकाश रहा। इस वजह से पूरे सप्ताह केवल चार दिन ही कारोबार हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी गिरावट बाजार की कमजोरी केवल सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं रही। मझौली और छोटी कंपनियों के शेयरों पर भी बिकवाली का भारी दबाव दिखाई दिया। मिडकैप 577.05 अंक यानी 3.5 फीसदी गिरकर 15,997.57 अंक पर बंद हुआ। वहीं स्मॉलकैप 236.52 अंक यानी 3.3 फीसदी लुढ़ककर 6,909.40 अंक पर आ गया। इस तरह दिग्गज कंपनियों के साथ-साथ छोटी और मझौली कंपनियों के शेयर भी बिकवाली की चपेट में रहे। कच्चे तेल की छलांग ने बढ़ाई बाजार की चिंता बाजार पर कमजोर वैश्विक संकेतों का बड़ा असर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी किए जाने की आशंका मजबूत हुई। इसके चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब दो दशक के ऊंचे स्तर के पास पहुंच गई। भारत और अमेरिका के बीच यील्ड का अंतर घटने से रुपये पर भी दबाव बढ़ा। इसी माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने सप्ताहभर बिकवाली तेज रखी। डीआईआई ने संभाला मोर्चा, फिर भी नहीं थमी गिरावट एफआईआई की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने लगातार खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की। घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बड़े हिस्से को संभाल लिया। इससे बाजार को कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन गिरावट को पूरी तरह रोका नहीं जा सका। इसके अलावा बड़ी संख्या में आए आईपीओ ने भी बाजार की नकदी अपनी ओर खींची। इससे पहले से सूचीबद्ध शेयरों पर दबाव बढ़ा। ऑटो से मेटल तक बिकवाली, आईटी ने बचाई लाज अलग-अलग क्षेत्रों के प्रदर्शन को देखें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, रियल्टी और मेटल शेयरों में कमजोरी रही।कमजोर थोक बिक्री के आंकड़ों के बाद ऑटो सेक्टर में ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। हालांकि, रुपये की कमजोरी के बीच आईटी सेक्टर को फायदा मिला। आईटी बढ़त दर्ज करने वाला इकलौता प्रमुख सेक्टर रहा। अब आरबीआई के फैसले पर बाजार की निगाह भारी गिरावट झेल चुके शेयर बाजार के लिए अगले सप्ताह सबसे महत्वपूर्ण घरेलू संकेत आरबीआई की मौद्रिक नीति से मिलेगा। रुपये को सहारा देने और आयात के कारण बढ़ने वाली महंगाई को नियंत्रित करने का दबाव बढ़ने के बीच ब्याज दर बढ़ाए जाने की उम्मीद मजबूत हुई है। ऐसे में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि आरबीआई ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला करता है और आगे के लिए उसका रुख कैसा रहता है। पीएमआई बताएगा अर्थव्यवस्था की रफ्तार आरबीआई के फैसले के अलावा भारत के पीएमआई आंकड़े भी महत्वपूर्ण रहेंगे। इनसे संकेत मिलेगा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच देश की आर्थिक गतिविधियां कितनी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं। वहीं, अमेरिका के रोजगार आंकड़े, पीएमआई और एफओएमसी बैठक का ब्योरा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की नीति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। इन आंकड़ों का असर वैश्विक बॉन्ड यील्ड की दिशा पर भी पड़ सकता है। दूसरी तिमाही के नतीजों पर भी रहेगी नजर कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे भी आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही के नतीजे कमजोर रहने की आशंका के कारण बाजार का माहौल फिलहाल संवेदनशील बने रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव में बड़ी कमी आती है तो बाजार में तेज राहत की तेजी देखने को मिल सकती है। मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर जोर मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को चुनिंदा शेयरों पर ध्यान देने की बात कही गई है। खास तौर पर ऐसी कंपनियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं, जिनकी कमाई को लेकर तस्वीर साफ हो और बैलेंस शीट मजबूत हो। लंबी अवधि के निवेशक बाजार की कमजोरी का इस्तेमाल अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों के शेयरों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।