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मुंबई। महिला सशक्तिकरण की पक्षधर उपासना कामिनेनी कोनिडेला ने अपने फायदे या पुरुषों को खुश करने के लिए दूसरी महिलाओं को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि किसी महिला को नुकसान पहुंचाकर हासिल की गई सफलता वास्तविक जीत नहीं हो सकती और महिलाओं को एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने के बजाय आपसी सहयोग से आगे बढ़ना चाहिए। महिलाओं को महिलाओं का साथ देने की नसीहत हाल ही में एक कार्यक्रम में उपासना कामिनेनी कोनिडेला ने महिलाओं के आपसी संबंधों, सहयोग और सशक्तिकरण को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाज में कई ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें दूसरी महिलाओं के समर्थन और मदद की जरूरत है। लेकिन इसके साथ ही कुछ ऐसी प्रवृत्तियां भी मौजूद हैं, जिनमें व्यक्तिगत लाभ हासिल करने के लिए दूसरी महिलाओं को पीछे धकेलने की कोशिश की जाती है। उपासना ने इस सोच को बदलने की जरूरत बताई और कहा कि महिलाओं की वास्तविक ताकत एक-दूसरे को कमजोर करने में नहीं, बल्कि साथ लेकर आगे बढ़ने में है। ‘अपनी सफलता के लिए दूसरी महिला को मत कुचलो’ कार्यक्रम में उपासना ने अपनी रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि कुछ महिलाएं अपनी कामयाबी का रास्ता बनाने के लिए दूसरी महिलाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने ऐसी महिलाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी को नीचा दिखाकर या किसी कमजोर पुरुष को खुश करके सफलता पाने की सोच गलत है। उपासना के मुताबिक, व्यक्तिगत फायदे और खुशी के लिए दूसरी महिलाओं के साथ अन्याय करने का असर केवल संबंधित लोगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों और परिवारों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में रिसर्च के विस्तृत आंकड़े या उससे जुड़े विशिष्ट उदाहरण साझा नहीं किए। ‘एक महिला का दर्द दूसरी की जीत नहीं’ उपासना के संबोधन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश महिलाओं के बीच एकजुटता को लेकर रहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक महिला की तकलीफ को दूसरी महिला की उपलब्धि नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, महिलाओं को एक-दूसरे की कामयाबी से असुरक्षित महसूस करने के बजाय उसका सम्मान करना चाहिए। साथ ही, किसी महिला के सामने मुश्किल परिस्थिति आने पर उसे अकेला छोड़ने के बजाय मदद के लिए आगे आना चाहिए। उपासना ने कहा कि महिलाओं को अपनी सोच में बदलाव लाकर ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहां एक की तरक्की दूसरी के लिए प्रेरणा बने। पुरुषों को खुश करने के लिए महिलाओं को नीचा दिखाने पर सवाल अपने संबोधन में उपासना ने उस मानसिकता की भी आलोचना की, जिसमें कुछ महिलाएं किसी पुरुष की स्वीकृति या समर्थन पाने के लिए दूसरी महिलाओं के साथ गलत व्यवहार करती हैं। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे व्यक्ति को प्रभावित करने या व्यक्तिगत लाभ हासिल करने के लिए महिला के सम्मान और अधिकारों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उनका संदेश था कि महिलाओं को अपनी पहचान और सफलता के लिए दूसरों को कमजोर बनाने की जरूरत नहीं है। नि:स्वार्थ मदद करने वाली महिलाओं की सराहना उपासना ने कार्यक्रम में मौजूद उन महिलाओं की प्रशंसा भी की, जो बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के दूसरी महिलाओं की मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने आसपास ऐसे लोगों को रखना पसंद करती हैं, जो दूसरों की प्रगति में खुशी महसूस करते हैं और मुश्किल समय में उनका साथ देते हैं। उनके मुताबिक, महिलाओं के बीच विश्वास, सहयोग और सकारात्मक सोच का वातावरण बनना जरूरी है। उपासना ने इस बात पर भी जोर दिया कि सफलता की खुशी तब अधिक सार्थक होती है, जब उसके साथ दूसरों को आगे बढ़ने का अवसर भी मिले। गलती करने वालों को भी सुधार का मौका अपने कड़े संदेश के बीच उपासना ने एक और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने दूसरों के साथ गलत व्यवहार किया है, उन्हें अपनी गलती समझने और खुद को बदलने का अवसर भी मिलना चाहिए। उनके अनुसार, बदलाव की शुरुआत सोच और व्यवहार में सुधार से होती है इसलिए वह ऐसे लोगों को भी सुधार का मौका देने में विश्वास रखती हैं, जिन्होंने पहले दूसरों के साथ अन्याय किया हो। महिला सशक्तिकरण का मतलब सिर्फ अपनी तरक्की नहीं उपासना कामिनेनी कोनिडेला का यह बयान महिलाओं के बीच आपसी सहयोग और जिम्मेदारी की जरूरत को सामने लाता है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि महिलाएं एक-दूसरे की क्षमताओं को पहचानें, उनकी उपलब्धियों का सम्मान करें और जरूरत पड़ने पर सहयोग के लिए आगे आएं।