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मुंबई। कच्चे तेल की कीमतों में नए उछाल से महंगाई बढ़ने की चिंता गहराने और घरेलू बॉन्ड की ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दबाव में हुई भारी बिकवाली से बीते सप्ताह दो प्रतिशत से अधिक लुढ़के घरेलू शेयर बाजार की दिशा तय करने में अगले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) और बैंक ऑफ जापान (बीओजे) के नीतिगत फैसले महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सेंसेक्स 1,605 अंक गिरा, निफ्टी भी 22,600 पर आया घरेलू शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह भारी बिकवाली वाला रहा। छुट्टियों के कारण कम कारोबारी दिनों के बावजूद बाजार में गिरावट का दबाव लगातार बना रहा। बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सप्ताहभर में 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत गिरकर शुक्रवार को 73,123.83 अंक पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 546.15 अंक यानी 2.4 प्रतिशत टूटकर 22,600 अंक पर आ गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में दो प्रतिशत से अधिक की साप्ताहिक गिरावट ने बाजार में निवेशकों की बढ़ती सतर्कता को सामने ला दिया। मिडकैप-स्मॉलकैप में ज्यादा मार, गिरावट 7 प्रतिशत के करीब बाजार में सबसे ज्यादा नुकसान छोटी और मझौली कंपनियों के शेयरों को उठाना पड़ा। बीएसई का मिडकैप सूचकांक 865.55 अंक यानी 5.4 प्रतिशत गिरकर 15,143.47 अंक पर बंद हुआ। इससे भी ज्यादा दबाव स्मॉलकैप शेयरों पर रहा। स्मॉलकैप सूचकांक 475.17 अंक यानी 6.9 प्रतिशत टूटकर 6,440.65 अंक पर पहुंच गया। इस तरह बड़ी कंपनियों के मुकाबले छोटी कंपनियों के शेयरों में लगभग तीन गुना अधिक प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचे मूल्यांकन और उधार लेकर किए गए निवेश में कटौती के कारण मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली ज्यादा तेज रही। कच्चे तेल की तेजी ने बिगाड़ा बाजार का मूड कच्चे तेल की कीमतों में नए उछाल ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। इसके साथ ही घरेलू बॉन्ड यील्ड में तेजी ने शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर निवेशकों को सतर्क कर दिया। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब निवेशकों के लिए बॉन्ड से मिलने वाला संभावित रिटर्न बढ़ना है। ऐसी स्थिति में महंगे शेयरों का आकर्षण प्रभावित हो सकता है। कंपनियों के दूसरी तिमाही के बेहतर वित्तीय नतीजों से बाजार को कुछ सहारा जरूर मिला, लेकिन महंगाई और ब्याज दरों से जुड़ी चिंताएं अधिक प्रभावी रहीं। आईटी शेयरों ने संभाला मोर्चा, रियल्टी-मेटल में बिकवाली बीते सप्ताह अलग-अलग क्षेत्रों के शेयरों का प्रदर्शन भी काफी अलग रहा। आईटी क्षेत्र के शेयरों ने शुरुआती गिरावट से उबरते हुए सप्ताह का अंत लगभग बिना बदलाव के किया। कंपनियों की कमाई को लेकर बेहतर उम्मीदों और निवेशकों की दोबारा बढ़ती दिलचस्पी ने इस क्षेत्र को सहारा दिया। दूसरी ओर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और रियल एस्टेट क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। इन क्षेत्रों में उत्पादन लागत बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका से निवेशकों ने जोखिम कम किया। अगले सप्ताह फेड, ईसीबी और बीओजे पर टिकी निगाहें शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाओं वाला रहने की संभावना है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय केंद्रीय बैंक और बैंक ऑफ जापान के मौद्रिक नीतिगत फैसले वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे। निवेशक यह जानने की कोशिश करेंगे कि दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास को गति देने के बीच किस तरह संतुलन बनाते हैं। इन फैसलों से वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता और भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है। बॉन्ड यील्ड ऊंची रहने तक विदेशी निवेश का प्रवाह कमजोर बना रह सकता है। पश्चिम एशिया से कच्चे तेल और रुपये तक असर अगले सप्ताह पश्चिम एशिया के घटनाक्रम भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। इस क्षेत्र में होने वाले बदलाव कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय रुपये और घरेलू महंगाई की उम्मीदों पर भी पड़ने की आशंका है। यही वजह है कि निवेशकों की नजर केवल केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी बनी रहेगी। आईआईपी आंकड़े और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता भी अहम घरेलू मोर्चे पर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े बाजार को नई दिशा दे सकते हैं। इन आंकड़ों से देश में औद्योगिक गतिविधियों की स्थिति का संकेत मिलेगा। इसके अलावा कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करेंगे। बाजार यह देखेगा कि बेहतर कमाई केवल कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित है या अलग-अलग क्षेत्रों में भी दिखाई दे रही है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में होने वाली प्रगति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेगी। निवेशकों को सलाह....सस्ते दिख रहे हर शेयर पर दांव न लगाएं जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को सोच-समझकर शेयर चुनने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पूरे बाजार के एक साथ चढ़ने के बजाय कुछ खास कंपनियों और क्षेत्रों में बेहतर निवेश अवसर दिखाई दे सकते हैं। श्री नायर ने कहा कि ऐसी कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत आकर्षक रह सकते हैं, जिनकी भविष्य की कमाई को लेकर स्पष्टता है और जिनका मूल्यांकन उचित स्तर पर है। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ऊंचे मूल्यांकन तथा उधार आधारित निवेश का दबाव पूरी तरह कम होने तक सतर्क रहने की जरूरत है।



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