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सीवान। बिहार के सीवान जिले में जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में 23 अक्टूबर को हुए भीषण विस्फोट ने एक परिवार को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी पीड़ा अब अपनों की मौत के साथ एक लापता बेटी की तलाश में भी दिखाई दे रही है। हादसे में पांच लोगों की जान चली गई, जबकि अमीरुद्दीन मियां की पोती मुस्कान खातून का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार का कहना है कि पटाखा बनाने का काम बंद करने के लिए अमीरुद्दीन मियां को कई बार समझाया गया था लेकिन उन्होंने यह कारोबार नहीं छोड़ा। दो बेटियों की शादी तय थी, खुशियों की जगह छाया मातम विस्फोट से प्रभावित परिवार की बहू साबरीन खातून ने बताया कि घर में पांच बेटियां हैं। इनमें मुस्कान खातून और इशरत खातून की शादी तय हो चुकी थी। परिवार दोनों बेटियों की शादी की तैयारियों में जुटा था। आने वाले दिनों को लेकर घर में उम्मीदें थीं, लेकिन 23 अक्टूबर की घटना ने सब कुछ बदल दिया। जिस परिवार में शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब अपनों को खोने का दुख है। सबसे बड़ी चिंता मुस्कान को लेकर बनी हुई है, जिसका विस्फोट के बाद से कोई पता नहीं चल सका है। ‘कई बार मना किया, लेकिन पटाखे बनाना नहीं छोड़ा’ साबरीन खातून के अनुसार, अमीरुद्दीन मियां लंबे समय से पटाखा बनाने के कारोबार से जुड़े थे। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्य इस काम को बंद कराना चाहते थे। इसके लिए अमीरुद्दीन मियां से कई बार बातचीत की गई और उन्हें पटाखा निर्माण छोड़ने के लिए समझाया गया। साबरीन का कहना है कि परिवार की लगातार कोशिशों के बावजूद अमीरुद्दीन मियां ने यह काम जारी रखा। हादसे के बाद परिवार की यह बात सामने आने से पटाखा निर्माण से जुड़े जोखिम और उसकी निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खेत में थीं साबरीन, अचानक हो गईं बेहोश हादसे के समय साबरीन खातून घर के भीतर नहीं थीं। उन्होंने बताया कि वह बाहर खेत में मौजूद थीं। इसी दौरान वह बेहोश हो गईं। इसके बाद क्या हुआ, उन्हें कुछ याद नहीं है। साबरीन के मुताबिक, उन्हें यह भी नहीं मालूम कि बेहोशी की हालत में कौन उन्हें वहां से लेकर गया और किस तरह वह सीवान के अस्पताल पहुंचीं। जब उनकी आंख खुली तो उन्होंने खुद को सीवान में पाया। अस्पताल कैसे पहुंचीं, यह भी नहीं पता साबरीन ने बताया कि होश आने के बाद उन्होंने डॉक्टर से भी जानने की कोशिश की कि उन्हें अस्पताल कौन लेकर आया था। हालांकि, उन्हें इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।हादसे के बाद की परिस्थितियों से अनजान साबरीन के सामने अपने परिवार तक पहुंचने की मुश्किल भी थी। उन्होंने बताया कि किसी से किराये के लिए पैसे और किसी से दूसरी आर्थिक मदद लेकर वह गोपालगंज पहुंचीं। सुबह छह बजे रिश्तेदार के घर पहुंचीं साबरीन के अनुसार, सीवान से निकलने के बाद वह गोपालगंज में अपने दूर के रिश्तेदार नौशाद आलम के पास पहुंचीं। नौशाद आलम मीडिया से जुड़े हैं। साबरीन सुबह करीब छह बजे उनके यहां पहुंचीं। इसके बाद उनका मीडिया से संपर्क हुआ और उन्होंने परिवार पर आई विपत्ति तथा हादसे के बाद अपने साथ हुई घटनाओं की जानकारी साझा की। पटाखा फटा, बम या सिलेंडर? साबरीन ने नहीं किया कोई दावा विस्फोट के कारण को लेकर साबरीन ने कोई निश्चित दावा करने से इनकार किया है। उनका कहना है कि घटना के समय वह घर से बाहर थीं और उन्होंने विस्फोट होते हुए अपनी आंखों से नहीं देखा। ऐसे में वह यह नहीं बता सकतीं कि धमाका पटाखों से हुआ, किसी बम से हुआ या गैस सिलेंडर फटने से। साबरीन ने साफ किया कि जिस घटना को उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा, उसके कारण के बारे में निश्चित बात कहना उचित नहीं होगा। विस्फोट की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पांच मौतों के बीच मुस्कान की तलाश ने बढ़ाई बेचैनी आलमपुर की घटना में पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन मुस्कान खातून का अब तक पता नहीं चल पाया है। परिवार के लिए यह अनिश्चितता बेहद पीड़ादायक बनी हुई है। एक ओर अपनों की मौत का सदमा है, तो दूसरी ओर मुस्कान के बारे में किसी ठोस जानकारी का इंतजार। साबरीन के बयान से स्पष्ट है कि विस्फोट ने परिवार को न केवल अपनों से वंचित किया, बल्कि भविष्य के लिए संजोई गई खुशियों को भी गहरे दुख में बदल दिया। अब पटाखा कारोबार की निगरानी पर सवाल साबरीन के मुताबिक, परिवार में पटाखा निर्माण का काम लंबे समय से चल रहा था और इसे बंद कराने के लिए घर के लोग कई बार आग्रह कर चुके थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जोखिम भरे इस कारोबार की निगरानी और सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्थाएं थीं। हालांकि, विस्फोट की वजह और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों का अंतिम निर्धारण जांच के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल आलमपुर का पीड़ित परिवार पांच लोगों की मौत के गम से जूझ रहा है। दो बेटियों की शादी की तैयारियां अधूरी रह गई हैं और मुस्कान की तलाश अब भी परिवार की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।



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