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Latest Feature stories, updates and analysis — 19 articles.

माटी की अंतिम पुकार : सभ्यता के नाम एक मौन संदेश
"एक दिन जब इतिहास भविष्य से पूछेगा कि तुमने अपनी सभ्यता को बचाने के लिए क्या किया था, तब शायद उत्तर किसी संसद, किसी…

बदलता समय, टूटते सपने और अस्तित्व का संघर्ष
"इतिहास में कोई भी सभ्यता अपने शिल्पियों के बिना जीवित नहीं रह सकती। लेकिन विडंबना यह है कि सभ्यता जितनी समृद्ध होती…

एक दिन कुम्हार के घर : जहां मिट्टी सांस लेती है और चाक प्रार्थना बन जाता है
"किसी समाज को समझना हो तो उसके राजमहलों में मत जाइए। उस कारीगर के घर जाइए, जो बिना किसी शोर के उस समाज की ज़रूरतें…

अय्यनार के टेराकोटा घोड़े : आस्था, कला और ग्रामीण संस्कृति के अमर प्रहरी
तमिलनाडु के गांवों में सदियों से खड़े हैं मिट्टी के विशाल घोड़े, जो सिर्फ शिल्प नहीं बल्कि लोकविश्वास, संस्कृति और…

बांकुरा की टेराकोटा कला: लाल मिट्टी में सांस लेती बंगाल की 400 साल पुरानी विरासत
पंचमुरा का प्रसिद्ध टेराकोटा घोड़ा बना भारतीय लोककला की पहचान, जीआई टैग से मिली वैश्विक पहचान; परंपरा और आधुनिकता का…

मिथिला की मिट्टी शिल्प : लोकआस्था, संस्कृति और सभ्यता की अमर विरासत
"भारत की मिट्टी केवल अन्न नहीं उगाती, वह संस्कृति भी गढ़ती है। यही मिट्टी कभी सिंधु घाटी की मातृदेवी बनती है, कभी…

गुजरात की माटी : खावड़ा की लोककला से मोरबी के वैश्विक सिरेमिक साम्राज्य तक
"एक मिट्टी स्मृतियां गढ़ती है, दूसरी उद्योग। एक चाक पर लोककथा रचती है, दूसरी आधुनिक कारखानों में विश्व बाज़ार का…

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया
"आपका जीवन आंदोलन से बड़ा नहीं, लेकिन आंदोलन के लिए अनिवार्य है"

गोरखपुर टेराकोटा : लाल मिट्टी में सजी भारतीय लोककला की अमर गाथा
"धरती जब कलाकार की उँगलियों का स्पर्श पाती है, तब वह केवल मिट्टी नहीं रहती—वह संस्कृति बन जाती है। गोरखपुर की लाल…

भारतीय अर्थव्यवस्था के मौन शिल्पकार : जब कुम्हार के चाक पर घूमती है राष्ट्र की समृद्धि
"जिस देश के गाँवों में चाक घूमना बंद हो जाए, वहाँ केवल मिट्टी के बर्तन ही नहीं, अर्थव्यवस्था की आत्मा भी सूखने लगती है।"

जब साहित्य ने कुम्हार को अपना कवि बनाया
कबीर के दोहों से लेकर प्रेमचंद, रेणु, महादेवी वर्मा और दिनकर तक... भारतीय साहित्य में कुम्हार सिर्फ एक पेशा नहीं,…

माटी की स्मृति : जब सभ्यता ने कला का रूप लिया
मिट्टी से बने एक साधारण पात्र में केवल पानी या अन्न नहीं रखा गया—उसमें मनुष्य ने अपनी स्मृतियाँ, आस्थाएँ, तकनीक और…