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Latest Feature stories, updates and analysis — 26 articles.

मिथिला की मिट्टी शिल्प : लोकआस्था, संस्कृति और सभ्यता की अमर विरासत
"भारत की मिट्टी केवल अन्न नहीं उगाती, वह संस्कृति भी गढ़ती है। यही मिट्टी कभी सिंधु घाटी की मातृदेवी बनती है, कभी…

गुजरात की माटी : खावड़ा की लोककला से मोरबी के वैश्विक सिरेमिक साम्राज्य तक
"एक मिट्टी स्मृतियां गढ़ती है, दूसरी उद्योग। एक चाक पर लोककथा रचती है, दूसरी आधुनिक कारखानों में विश्व बाज़ार का…

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया
"आपका जीवन आंदोलन से बड़ा नहीं, लेकिन आंदोलन के लिए अनिवार्य है"

गोरखपुर टेराकोटा : लाल मिट्टी में सजी भारतीय लोककला की अमर गाथा
"धरती जब कलाकार की उँगलियों का स्पर्श पाती है, तब वह केवल मिट्टी नहीं रहती—वह संस्कृति बन जाती है। गोरखपुर की लाल…

भारतीय अर्थव्यवस्था के मौन शिल्पकार : जब कुम्हार के चाक पर घूमती है राष्ट्र की समृद्धि
"जिस देश के गाँवों में चाक घूमना बंद हो जाए, वहाँ केवल मिट्टी के बर्तन ही नहीं, अर्थव्यवस्था की आत्मा भी सूखने लगती है।"

जब साहित्य ने कुम्हार को अपना कवि बनाया
कबीर के दोहों से लेकर प्रेमचंद, रेणु, महादेवी वर्मा और दिनकर तक... भारतीय साहित्य में कुम्हार सिर्फ एक पेशा नहीं,…

माटी की स्मृति : जब सभ्यता ने कला का रूप लिया
मिट्टी से बने एक साधारण पात्र में केवल पानी या अन्न नहीं रखा गया—उसमें मनुष्य ने अपनी स्मृतियाँ, आस्थाएँ, तकनीक और…

कुम्हार की अनकही प्रयोगशाला : आग, पानी और मिट्टी का विज्ञान
कुम्हार केवल शिल्पकार नहीं, बल्कि प्रकृति का मौन वैज्ञानिक है। मिट्टी, पानी, आग और समय के अद्भुत संतुलन से वह सदियों…

सभ्यता का पहला शिल्प : जब मिट्टी ने मनुष्य को सभ्य बनाया
कृषि ने इंसान को बसना सिखाया, लेकिन मिट्टी के बर्तनों ने दिया व्यवस्थित जीवन का आधार; दुनिया भर में मिले हजारों साल…

कुम्हार : जिसकी हथेलियों में बसती है सभ्यता की आत्मा
यह सिर्फ बर्तनों की कहानी नहीं, मिट्टी, मनुष्य और भारतीय संस्कृति के उस रिश्ते की दास्तान है, जिसने हजारों वर्षों से…

बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने की टीस और पहाड़ों की थकी हुई चुप्पी
गुफा में बर्फ का शिवस्वरूप लगभग अंतर्ध्यान है लेकिन जम्मू से अमरनाथ तक अब भी ‘हर-हर महादेव’ की गूंज थमी नहीं; यह सिर्फ…

…दीया खामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है
तीजन बाई चली गईं: गांव की मिट्टी से उठी वह आवाज, जिसने सदियों पुरानी कथा को फिर से सांस दी